उधमसिंहनगर – बशीर साहब का एक शेर है , “दुश्मनी जम करो मगर ये गुंजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हों जाएं तो शर्मिंदा न हों” हालांकि राजनीति में स्वाभिमान और शर्मिंदा शब्द तो है लेकिन उनके माएने कुछ होते नहीं। अगर होते तो आज समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन न हुआ होता।
खैर यहां दुश्मनी ने नहीं बल्कि दोस्ती में शर्मिंदा होने की नौबत आ गई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस से सपा की यारी पर पूछ लिया है कि वो सपा लीडर अखिलेश की उस सोच पर अपना स्टैंड क्लियर करें जिसमें उन्होने उत्तराखंड जनता को घुसपैठिया बताया है। सीएम धामी ने कहा कांग्रेस बताए वो सपा की इस बात का कितना समर्थन करती है ! वो सपा के साथ है या उत्तराखंड की जनता के साथ।
सीएम धामी ने ये भी कहा कि उत्तराखंड की जनता स्वभिमानी है और उसे उत्तराखंड राज्य आंदोलन का हर वो सितम याद है जो तत्कालीन समाजवादी सरकार ने उत्तराखंड की जनता पर ढाया था। सीएम धामी ने सपा लीडर अखिलेश और उनके पॉलिटिकल पार्टनर कांग्रेस सो चेताते हुए दो टूक कहा है कि उत्तराखंड की जनता को खटीमा गोलीकांड भी याद है और मसूरी गोलीकांड भी हम मुज्जफरनगर के रामपुर तिराहा कांड को भी नहीं भूले हैं।
बहरहाल अखिलेश यादव का घुसपैठिए वाला बयान कांग्रेस के लिए गले की हड्डी बन गया है। न निगलते बन रहा है न उगलते। उगलते हैं तो आलाकमान से फटकार मिल सकती है और निगलते हैं तो जनता फटकारने में वक्त नहीं लगाएगी। बहरहाल अखिलेश ने जहां अपने बयान से जहां उर्मिला सनावर के बयानो के चक्रव्यू में उलझी भाजपा को बड़ी संजीवनी दी है वहीं प्रीतम सिंह एड़ ब्रदर्स के धमकाने वाले ऑडियो मे फंसी कांग्रेस को और उलझा दिया है। ऐसे में देखना ये दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस मुसीबत से कैसे पार पाती है।

