गला रेत देंगे, तेज़ाब फेंक देंगे…फोन पर दे रहे थे बेटियों को धमकी पुलिस ने निकाल दी सारी हेकड़ी..

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ऊधमसिंह नगर- मोबाइल फोन सहूलियत है लेकिन जिनके दिमाग में बदमाशी का फितूर हो उनके हाथ में फोन भी खतरनाक हथियार है। फोन के जरिए बेटियों का दिन का चैन और रात का सुकून छीनने वाले दो आरोपियों को उधमसिंहनगर पुलिस ने हिरासत में लिया है। दिनेशपुर थाना क्षेत्र के एक शिक्षण संस्थान की छह छात्राओं आरोपियो ने जीना मुहाल कर दिया था।

आरोपों के मुताबिक आरोपी मोहम्मद बिलाल ने शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाली छह छात्राओं के नाम, पते, मोबाइल नंबर और फोटो जैसी निजी जानकारी अपने साथी अनस के साथ साझा की थी। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने छात्राओं को अपने शैतानी दिमाग के शिकंजे में कसने के लिए उन पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां करनी शुरू कर दी।

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बेटियों ने आरोपियों को उनकी नजायज हरकत से बाज आने की हिदायत दी और उनकी करतूत पर आंखे दिखाई तो आरोपी तालीम लेने वाली छात्राओं को गाली-गलौच करने के साथ गला काटने और तेजाब फेंकने जैसी गंभीर धमकियां देने लगे। संपोले डसने के लिए अपना फन उठाते कि उससे पहले ही पुलिस ने आरोपियों को सबक सिखा दिया।

मामले की संजीदगी को देखते हुए दिनेशपुर थाना पुलिस की तीन टीमें तैयार की। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी अनस नेपाल सीमा की ओर फरार होने की फिराक में था,उसके मंसूबे कामयाब हो पाते उससे पहले ही पुलिस ने उसे बनबसा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरे आरोपी मोहम्मद बिलाल को भी पुलिस ने दबोच लिया।

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अनुषा बडोला, एस.पी.क्राइम

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं। जिनके डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि पता चल सके कि आरोपियों ने छात्राओं की निजी जानकारी कहां से हासिल की और उनके साथ कितनी छेड़ाखानी की है। वही पुलिस इस मामले की पड़ताल में संलीके से जुट गई है ताकि पता चल सके कि आरोपी मोहरे हैं या मास्टरमाइंड । कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके पीछे कोई और भी हो या

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बहरहाल गिरफ्तार दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के रामपुर और गाजियाबाद जनपद के निवासी हैं। काश उत्तराखंडियों को घुसपैठिए बताने वाले नेता इस वारदात पर और इसमें शामिल आरोपियों के प्रोफाइल पर भी नजरेंइनायत कर पाते, तो बहुत सारी वो बाते समझ जाते कि 80- 90 के दशक में अलग उत्तराखंड राज्य की मांग के पीछे एक नहीं कई वजहें थी।