देहरादून: अतिरिक्त डेडलाइन खत्म की कगार पर, मियांवाला-रायपुर रोड के जख्मों को मसीहा का इंतजार

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देहरादून। सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेशभर की सड़कों की पैचिंग और मरम्मत के लिए 25 अक्टूबर तक अतिरिक्त डेडलाइन तय की गई है लेकिन सड़कों के जख्म भरने के लिए जिन एजेंसियों को धरातल पर उतारा गया था उनकी सुस्ती के नतीजतन राजधानी देहरादून के कई प्रमुख मार्ग अब भी गढ्ढों की धूल फांक रहे हैं। दून शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़कों की खस्ताहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे रोजाना आवागमन करने वाले आम नागरिक और वाहन चालक भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

इस प्रशासनिक नाकामी का ताजा और गंभीर मामला देहरादून के मियांवाला से रायपुर रोड का है, जहां सड़क की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। लोवर तूनवाला और चक तूनवाला से गुजरने वाला यह प्रमुख मार्ग सीधे रायपुर क्षेत्र को जोड़ता है, लेकिन बदइंतजामी के कारण इस पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है।

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यह सड़क मियांवाला को रायपुर, राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, मसूरी, सहस्त्रधारा और देहरादून शहर के अन्य व्यस्त मार्गों से जोड़ती है। राजधानी के इतने महत्वपूर्ण और सामरिक रूट पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना सीधे तौर पर PWD और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने बताया कि सड़क पर जगह-जगह बड़े और जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों के कारण इस मार्ग पर आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं और गंभीर सड़क हादसे हर रोज का सिलसिला बन चुके हैं। क्षेत्रवासियों ने कई बार संबंधित अधिकारियों और विभाग को लिखित व मौखिक शिकायतें दी हैं बावजूद इसके धरातल पर स्थिति जस की तस है और मरम्मत का कोई भी ठोस कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे जनता में रोष व्याप्त है।

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दिन के समय लोग जैसे-तैसे इन गढ्ढों से बच-बचाकर गुजर जाते हैं लेकिन रात के समय चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता है। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह मार्ग किसी आपदा से कम नहीं साबित हो रहा है। स्थानीय जनता का साफ कहना है कि जब तक लापरवाह अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता को गड्ढा मुक्त सड़कों की सौगात नहीं मिल पाएगी।

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बहरहाल, सड़कों की मरम्मत के लिए तय डेडलाइन के अभी कुछ दिन शेष हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि डेडलाइन समाप्ति से पहले इन गढ्ढों की भराई कर इनका स्थाई समाधान जल्द किया जाएगा।