Dehradun: बदला डेंगू का क्लीनिकल पैटर्न, पहले चरण में दिखे शॉक सिंड्रोम के लक्षण

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देहरादून। डेंगू वायरस की चपेट में आ रहे मरीजों का क्लीनिकल पैटर्न अचानक बदल गया है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय भंडारी और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कुमार जी कौल के अनुसार, अब मरीजों में दूसरे चरण यानी डेंगू शॉक सिंड्रोम के लक्षण पहले चरण में ही दिखाई दे रहे हैं।

मौसम में आ रहे बार-बार बदलाव, बारिश और धूप के कारण जिले में स्थिति और संवेदनशील हो गई है। इसका सीधा असर आम जनता और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि क्लीनिकल पैटर्न में इस बदलाव की मुख्य वजह एक ही व्यक्ति को अलग-अलग स्ट्रेन के मच्छरों द्वारा काटना है। यदि किसी व्यक्ति को चार में से दो या उससे अधिक स्ट्रेन के मच्छर काटते हैं, तो शरीर में बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।

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ऐसी स्थिति में मरीज के शरीर में प्लाज्मा लीक होने लगता है। इसके साथ ही अंदरूनी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जिसे डॉक्टर बेहद जानलेवा मान रहे हैं।

सामान्य तौर पर डेंगू का मरीज तीन चरणों से गुजरता है। पहले चरण में 2 से 7 दिनों तक तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द और बदन दर्द होता है। दूसरा चरण 7 से 14 दिनों तक चलता है, जिसमें मरीज डेंगू शॉक सिंड्रोम से जूझता है और प्लेटलेट्स तेजी से गिरती हैं। तीसरा चरण रिकवरी का होता है।

लेकिन वर्तमान में बदले पैटर्न के कारण कई मरीजों को पहले चरण में ही शरीर के अंदर ब्लीडिंग हो रही है। डॉ. कौल के मुताबिक, इस ब्लीडिंग से फेफड़ों और छाती में पानी भर रहा है, जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है।

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ऐसे में डॉक्टरों ने सलाह दी है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत एलिजा जांच करवाएं। सही समय पर जांच होने से ही स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

देहरादून में डेंगू संक्रमण का दायरा लगातार फैल रहा है। दून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा के अनुसार, मई से अब तक 44 मरीजों में डेंगू की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 41 अन्य लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

आमतौर पर क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप सितंबर के बाद दिखता था। हालांकि, इस बार मौसम के बदले मिजाज ने समय से पहले ही बीमारी को फैला दिया है।

बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दून में 10 संवेदनशील हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। इन इलाकों में विशेष निगरानी और दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है।

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डीएवी कॉलेज के जंतु विज्ञान विशेषज्ञ सुनील कुमार के अनुसार, इस समय बना मौसम मादा मच्छरों के पनपने के लिए बेहद सुगम है। यह स्थिति डेंगू के बड़े आउटब्रेक का कारण बन सकती है।

मादा मच्छर अपने अंडों के विकास के लिए जब इंसानों का खून चूसती हैं, तो शरीर में पैरासाइट छोड़ देती हैं। मुख्य रूप से चार प्रजातियां—एडीज एजिप्टी, एडीज एल्बोपिक्टस, एडीज पॉलीनेसिअंसिस और एडीज स्कुटेलारिस ही डेंगू फैलाती हैं।

डेंगू के इस बदले पैटर्न और बढ़ते खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने बचाव के कड़े निर्देश दिए हैं। लोगों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने और घर के आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की गई है।

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