देहरादून में भ्रामक ऑनलाइन सामान बेचने वाली 10 ई-कॉमर्स कंपनियों पर 10 लाख जुर्माना

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देहरादून। ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को अधूरी, गलत और भ्रामक जानकारी देना 10 ई-कॉमर्स कंपनियों को भारी पड़ गया है। बाट-माप विभाग ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नियमों का उल्लंघन करने वाली ऑनलाइन ग्रॉसरी, फैशन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की 10 स्थानीय और राष्ट्रीय कंपनियों पर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

विभागीय जांच के दौरान सामने आया कि ये कंपनियां अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर बेचे जा रहे उत्पादों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां छुपा रही थीं। उत्पादों की नेट मात्रा, कंट्री ऑफ ओरिजिन, निर्माता का नाम-पता, एक्सपायरी डेट और रिटर्न या रिफंड पॉलिसी जैसी अनिवार्य शर्तें ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं की जा रही थीं।

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जांच में विभाग ने यह भी पाया कि कुछ ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर दिखाई गई फोटो और असल में ग्राहक को डिलीवर किए गए सामान में बड़ा अंतर था। इसके अलावा कई कंपनियां उत्पाद की वास्तविक कीमत, एमआरपी (MRP) और लागू टैक्स से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रही थीं। लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद बाट-माप विभाग के सीनियर इंस्पेक्टर प्रवीण नेगी की अगुवाई में यह विशेष जांच अभियान चलाया गया।

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वरिष्ठ इंस्पेक्टर प्रवीण नेगी ने बताया कि तेजी से बढ़ते ऑनलाइन कारोबार को देखते हुए अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की निगरानी सख्त कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार पहली बार खामी मिलने पर कंपनी को नोटिस जारी कर सुधार का मौका दिया जाता है। यदि कंपनी दोबारा नियमों की अनदेखी करती है, तभी उस पर चालानी और दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इससे पूर्व बीते वित्त वर्ष 2025-26 में भी 70 कंपनियों पर कार्रवाई कर 42 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया था।

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लीगल मेट्रोलॉजी नियम-2011 के तहत हर ऑनलाइन विक्रेता के लिए उत्पाद का पूरा नाम, ब्रांड, निर्माता/आयातकर्ता का पता, सटीक वजन या माप, एमआरपी, निर्माण व एक्सपायरी तिथि और कस्टमर केयर विवरण देना अनिवार्य है।

विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी फोटो में एक उत्पाद दिखाकर दूसरा सामान नहीं भेज सकती, ना ही अतिरिक्त चार्ज छुपा सकती है। ग्राहकों को भ्रमित कर सामान बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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