देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। इसके कारण कर्मचारियों के सामने एक बार फिर कोरोना काल जैसी विकट आर्थिक स्थिति पैदा हो गई है। अगस्त का महीना बीतने को है, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों को अब तक जून माह का वेतन भी नहीं मिल सका है।
आय और खर्च में बढ़ते भारी अंतर के कारण निगम की माली हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इसका सीधा असर रोडवेज के हजारों नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। रोडवेज को अपने नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन के लिए हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। लेकिन आय और खर्च का असंतुलन गहराने से वेतन का संकट खड़ा हो गया है।
वर्तमान में रोडवेज की रोजाना की औसत आय करीब 1.5 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले दैनिक खर्च बढ़कर 2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे वित्तीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। निगम के इस घाटे का मुख्य कारण रोडवेज बसों में यात्रियों की घटती संख्या है। यात्रियों का बड़ा वर्ग अब सरकारी रोडवेज छोड़कर निजी बसों की ओर रुख कर रहा है।
सवारियां न मिलने के कारण सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। नतीजतन रोडवेज को हर दिन करीब 50 लाख रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस बीच उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक क्रांति सिंह ने बताया कि जून महीने के वेतन का वितरण शुरू कर दिया गया है। प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। महाप्रबंधक ने आश्वस्त किया कि जल्द ही नियमित कर्मचारियों का बकाया वेतन भी जारी कर दिया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को राहत मिल सकेगी।

