Uttarakhand: सड़क नहीं, स्वास्थ्य सुविधा नहीं…पहाड़ में मरीज कंधे पर, सिस्टम सवालों के घेरे में..!

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देहरादून। कभी अदालत की फटकार तो कभी सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीरें और वीडियो…उत्तराखंड का स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है। चुनावी साल में स्वास्थ्य व्यवस्था की यह तस्वीर सरकार और सिस्टम दोनों के लिए चिंता का सबब बन सकती है।

सवाल सीधा है अगर व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं तो फिर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आज भी कंधों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है? स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के बीच पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक से सामने आया एक वीडियो सिस्टम की पूरी कहानी बयां करता नजर आ रहा है।

कमलिया पल्ला क्षेत्र में एक मजबूर पति अपनी पत्नी को उपचार के लिए कंधे पर लटकाकर ले जाने को मजबूर दिखाई दे रहा है। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि सड़क और स्वास्थ्य दोनों व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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वीडियो में व्यक्ति बताता दिखाई दे रहा है कि सड़क नहीं होने के कारण उसे अपनी पत्नी को करीब पांच से छह किलोमीटर तक पैदल लेकर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद अस्पताल तक पहुंचाने की चुनौती अलग है। सबसे ज्यादा मार्मिक बात यह है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताते हुए कहा है कि वह इस विषय पर बात ही नहीं करना चाहता। उसके इस जवाब में पहाड़ के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों की पीड़ा साफ झलकती है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ जब किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए सड़क के अभाव में कई किलोमीटर तक कंधे का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच आखिर इतनी बड़ी दूरी क्यों है?

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सड़क और स्वास्थ्य, दोनों कटघरे में

इस पूरे मामले में सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराना भी पर्याप्त नहीं होगा। पहाड़ों में सड़क स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी है। सड़क नहीं होगी तो एंबुलेंस गांव तक कैसे पहुंचेगी? गंभीर मरीज अस्पताल तक समय पर कैसे पहुंचेगा? गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दुर्घटना के शिकार लोगों को समय पर उपचार कैसे मिलेगा?

यही वजह है कि कमलिया पल्ला का यह वीडियो सड़क और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए आईना बनकर सामने आया है। एक तरफ सड़क की कमी मरीज को पैदल चलने और कंधे पर अस्पताल पहुंचने को मजबूर कर रही है, तो दूसरी तरफ दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कोर्ट की फटकार से सोशल मीडिया तक सवाल

स्वास्थ्य विभाग पहले भी तबादलों, व्यवस्थाओं और कामकाज को लेकर सवालों में रहा है। कभी न्यायालय की टिप्पणियां सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं तो कभी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर दिखा देते हैं। ऐसे में चुनावी साल में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।

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सरकार के सामने चुनौती सिर्फ नई योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ गांव के मरीज को सड़क, एंबुलेंस और अस्पताल तीनों सुविधाएं समय पर मिलें। कमलिया पल्ला की तस्वीर एक परिवार की पीड़ा से आगे बढ़कर पूरे सिस्टम से सवाल पूछ रही है आखिर पहाड़ का मरीज कब तक सड़क के अभाव में कंधे और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में किस्मत के भरोसे रहेगा?

यह वीडियो एक मार्मिक अपील भी छोड़ जाता है अगर सड़क होती, तो शायद हालात इतने मुश्किल नहीं होते। अब देखना होगा कि सिस्टम इस सवाल को सिर्फ एक वायरल वीडियो मानकर भूल जाता है या फिर इसे सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का सबक बनाता है।

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