उत्तराखंड में कांग्रेस का चुनावी शंखनाद: 28 जून से शुरू होगा ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’

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उत्तराखंड की सियासी फिजा चुनावी मोड में है.भाजपा, कांग्रेस यूकेडी या फिर दूसरे दल सभी अपने आपको दिखा रहे हैं कि हम में दम है। हालाकि भाजपा और कांग्रेस को छोड़ दिया जाए तो बाकी दल अभी सोशल मीडिया पर ही सक्रिय दिख रहे हैं। हालांकि कुछ पर्वतीय जिलों में यूकेडी ने भी जनसंपर्क अभियान शुरू कर चुनावी तैयारियों का बिगुल बजा दिया है।

बहरहाल बात दो बड़ी पार्टियों की जाए तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्य़क्ष नितीन नबीन तीन दिन का सियासी दौरा और दो दिन का निजी दौरा उत्तराखंड का कर चुके हैं। उधर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा भी दो तीन चक्कर लगा चुकी है। हालांकि वे कभी भी अपने तय दौरे को पूरा नहीं कर पाई। बीच में ही वापस चली गई। मगर माना जा रहा है कि जो भी किया कुछ-न-कुछ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मंत्र दिए होंगे। शायद उन्ही मंत्रों पर जान फूंक कर कांग्रेस पार्टी सूबे की सत्ता में वापसी करने का प्लान बना रही है।

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बहरहाल शनिवार को देहरादून में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। जिसमे पार्टी के प्रदेश चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मीडिया को संबोधित किया। जिसमे कांग्रेस ने मीडिया को अपना चुनावी आगाज का प्लान बताया। प्रीतम सिंह ने कहा कांग्रेस 28 जून से पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है। जिसे राज्य में दो चरणों में चलाया जाएगा। जिसके तहत प्रदेश को चार जोन में बांटा गया है। जिसकी जिम्मेदारी कई नेताओं को दी गई है।

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मसलन प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को कुमाऊ के तीन पर्वतीय जिलों में परिवर्तन संकल्प की जिम्मेदारी दी गई है तो पूर्व अध्यक्ष करण माहरा को दो जिलों की। जबकि गढ़वाल मंडल में प्रीतम सिंह और सदन मे उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी टिहरी और उत्तरकाशी में जनता के बीच परिवर्तन संकल्प कराने उतरेंगे तो पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग मे डाक्टर हरक सिंह जनता के बीच परिवर्तन संकल्प की धाद लगाएंगे।जबकि राज्य के मैदानी जिलों हरिद्वार, उधमसिंहनगर और देहरादून में पहले चरण के पहाड़ी जिले निपटाने के बाद परिवर्तन संकल्प के लिए जनता के बीच कूदा जाएगा।

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दिलचस्प बात ये है कि पार्टी ने यशपाल आर्य और एक्स सीएम हरीश रावत को इस बात की पूरी आजादी दी है कि वे जहां चाहें वहां जनता के बीच परिवर्तन का संकल्प लेकर जा सकते हैं। कांग्रेस ने दो चरणों में चलने वाले परिवर्तन संकल्प का प्लान तो तैयार कर दिया है। अब देखना ये है कि जनता कांग्रेस की बात को कितनी अहमियत देती है और क्या नतीजे देती है। परिवर्तन करती है या फिर संकल्प रहित विकल्प पर अटक जाती है। जनता का मन है चुनाव की घड़ी ही बताएगी।

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