सूबे की धामी सरकार ने राज्य के 11 पहाड़ी जिलो के गांवो में पलायन से पसरे सन्नाटे को तोड़ने और बंजर होती खेती के रकबे को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए शानदार पहल की है। इन पहाड़ी जिलों में स्वैच्छिक चकबंदी अपनाने वाले किसानों को स्वरोजगारपरक योजनाओं के लिए लोन लेने पर ब्याज में पांच फीसद की छूट दी जाएगी,यानि सौ रूपए पर 9 रुपए ब्याज वाले कर्ज पर सिर्फ चार रूपए सालना देना होगा।
वहीं जिन गांवों से चकबंदी का रिजल्ट सौ फीसद मिलेगा वहां बुनियादी सहूलियतों का विकास तो होगा ही, खेती-किसानी के लिए नई नई तकनीकों वाली मशीने, सिंचाई की सुविधा खेतों की घेरबाड़ जैसी योजनाएं भी दी जाएंगी ताकि गांव फिर से आबाद हो सकें।
गौरतलब है कि धामी सरकार ने राज्य के पर्वतीय जिलों के लिए स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति लागू कर दी है। जिसके पहले चरण में पांच साल तक हर जिले में हर साल पांच-पांच ऐसे गांवों में चकबंदी की जानी है, जहां भूमि से संबंधित विवाद नहीं हैं। ऐसे गांवों का जिला स्तर पर चयन शुरू कर दिया गया है।
चकबंदी नीति के तहत चकबंदी अपनाने वाले किसानों को कई सुविधाएं भी मिलेंगी। किसानों को कृषि एवं कृषक कल्याण, पशुपालन, मत्स्य, डेयरी, सहकारिता, सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्राम्य विकास समेत अन्य विभागों की स्वरोजगारपरक योजनाओं में ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज छूट दी जाएगी।
यही नहीं, किसान उत्पादक समूहों व स्वयं सहायता समूहों के जरिए सामूहिक उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इतना ही नहीं स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने वाले किसानों को खाद्यप्रसंस्करण, मूल्यवर्द्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। सरकार की सोच तो अच्छी है बस अब जरूरत है रिवर्स माइग्रेशन के लिए उनमें जोश भरने की ताकि नतीजे शानदार मिल सकें।

