प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया उत्तराखंड दौरे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य की बुनियादी समस्याओं और ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश की जनता, विशेषकर युवा, 2022 और 2024 के चुनावों में किए गए वादों के पूरा न होने से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। विपक्ष ने कानून व्यवस्था और आर्थिक सहायता जैसे गंभीर विषयों पर केंद्र की बेरुखी पर सवाल उठाए हैं।
गणेश गोदियाल के मुख्य आरोप: उपेक्षा और ठगा सा युवा
कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड हर साल भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है, लेकिन केंद्र से कोई विशेष आर्थिक पैकेज नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। गोदियाल के अनुसार, प्रधानमंत्री केवल “सैर-सपाटे” के लिए उत्तराखंड आते हैं, जबकि स्थानीय लोग उनके दौरे से ठोस समाधानों और सकारात्मक निर्णयों की उम्मीद लगाए बैठे थे।
हरीश रावत का नजरिया: कॉरिडोर और विकास योजनाएं
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री दिल्ली-दून एलिवेटेड कॉरिडोर को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को समर्पित करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आदि कैलाश, बागेश्वर और कोसी-रामनगर जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के विकास की बात भूल गए। हालांकि, रावत ने इस बात की सराहना की कि पीएम ने विपक्ष को कोसने के बजाय सामूहिकता और महिला आरक्षण पर सहयोग की बात कही।
चुनावी वादे और जमीनी हकीकत
रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने याद दिलाया कि जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया था, लेकिन 10 वर्षों के बाद भी विकास के बड़े दावे धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। गोदियाल ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की जनता अब केवल भाषणों के बजाय अपने जीवन को प्रभावित करने वाली समस्याओं (जैसे बेरोजगारी और बुनियादी ढांचा) पर केंद्र सरकार से सीधी कार्रवाई चाहती है।

