महानिदेशालय में मंथन, सचिवालय में इंतजार, सचिव की बैठक भूल गए अधिकारी…??

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देहरादून। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों अजब-गजब हालात देखने को मिल रहे हैं। विभागीय कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और अब एक नया मामला चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे द्वारा शुक्रवार सुबह 9:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बैठक शुरू होने के समय ही स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव सौरभ गहरवार स्वास्थ्य महानिदेशालय पहुंच गए और वहां अधिकारियों के साथ अलग बैठक में व्यस्त हो गए।
बताया जा रहा है कि अपर सचिव की बैठक में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो गए। इस दौरान कुछ अधिकारी यह तक भूल गए कि उन्हें स्वास्थ्य सचिव द्वारा बुलाई गई बैठक में भी उपस्थित होना है। नतीजा यह रहा कि विभागीय गलियारों में पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि किसी भी विभाग में एक से अधिक बैठकों का आयोजन कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग के शीर्ष अधिकारी द्वारा पूर्व निर्धारित बैठक बुलाई गई थी तो उसके समानांतर दूसरी बैठक आयोजित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि बैठक जरूरी थी भी, तो क्या इसके लिए समय और समन्वय बेहतर नहीं हो सकता था? स्वास्थ्य विभाग में इस घटनाक्रम को प्रोटोकॉल और प्रशासनिक समन्वय से जोड़कर देखा जा रहा है। विभागीय जानकारों का कहना है कि किसी भी शासन व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बुलाई गई बैठकों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यदि अधिकारी समान समय पर दूसरी बैठकों में व्यस्त हो जाएं तो इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय और सचिवालय के गलियारों में दिनभर चर्चा होती रही। कुछ लोग इसे महज समन्वय की कमी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विभागीय प्रोटोकॉल की अनदेखी के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल मामला भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वास्थ्य विभाग में बैठकों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर आखिर समन्वय की जिम्मेदारी किसकी है। क्योंकि जब अधिकारी ही यह भूल जाएं कि उन्हें किस बैठक में जाना है, तो फिर विभागीय अनुशासन और प्रोटोकॉल पर सवाल उठना लाजिमी है।