देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों ने यात्रा का संचालन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य में भारी वर्षा के अलर्ट को देखते हुए सोमवार को 11 जिलों के 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर जहां-तहां हो रहे भूस्खलन को साफ करने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही यात्रा का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा।
गढ़वाल आयुक्त ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यात्रा मार्गों पर मौजूद श्रद्धालुओं को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर ठहराने की व्यवस्था की जा रही है और मौसम साफ न होने तक किसी भी यात्री को जोखिम भरे पहाड़ी रास्तों पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम और मार्ग की स्थिति सामान्य होने तक संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी सुबह से रुक-रुक कर बारिश का क्रम जारी है। तीर्थनगरी ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से काले घने बादल छाए हुए हैं और लगातार बूंदाबांदी हो रही है। लगातार हो रही बारिश से आम जनजीवन और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है।
ऋषिकेश में गंगा नदी के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल गंगा का जलस्तर चेतावनी के निशान से नीचे है। ऋषिकेश में गंगा का चेतावनी जलस्तर 339.50 मीटर निर्धारित है, जबकि वर्तमान में नदी 338.34 मीटर पर बह रही है। सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें 24 घंटे जलस्तर की मॉनिटरिंग कर रही हैं।
प्रदेश भर के संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। 11 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित होने के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

