उत्तराखंड के रुद्रपुर में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने एक बेहद बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। सिडकुल क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित कंपनी में देर रात मारे गए छापे के दौरान कुल 17 नाबालिग बच्चे बाल श्रम करते हुए रंगे हाथों पाए गए हैं। बाल कल्याण समिति को रविवार देर रात खुफिया सूचना मिली थी कि इस कंपनी में नियमों को ताक पर रखकर भारी संख्या में नाबालिगों से काम कराया जा रहा है।
सूचना के आधार पर समिति सदस्य गौरव तांगरा के नेतृत्व में बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। संयुक्त टीम ने रात करीब नौ बजे अचानक कंपनी परिसर में छापा मारा, जिसके बाद वहाँ हड़कंप मच गया और कंपनी का सुपरवाइजर मौके से भागने में सफल रहा।
आरोप है कि इस औचक कार्रवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन ने चालाकी दिखाते हुए बच्चों को परिसर में छिपाने की पुरज़ोर कोशिश भी की, लेकिन टीम की मुस्तैदी और सतर्कता के कारण अलग-अलग स्थानों से सभी 17 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह संवेदनशील रेस्क्यू अभियान देर रात करीब एक बजे तक लगातार जारी रहा, जिसमें बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष रजनीश बत्रा भी मौजूद रहीं।
समिति की सदस्य चंद्रकला राय ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों के परिजनों को तत्काल मौके पर बुलाया गया और उनसे कानूनी शपथपत्र भरवाए गए, जिसके तहत बच्चों को अनिवार्य शिक्षा से जोड़ने और दोबारा बाल श्रम न कराने का कड़ा आश्वासन लिया गया। इसके बाद सभी बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। फिलहाल, श्रम कानूनों और बाल संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

