बिहार,गुजरात, मणिपुर और मिजोरम के साथ-साथ, केद्रशासित लक्ष्यदीप छोड़ दिया जाए तो तकरीबन देश के सभी राज्य शराब बेचकर राजस्व जुटाते हैं। शराब की बिक्री राजस्व का बड़ा जरिया है। लिहाजा राज्य सरकारें शराब की बिक्री बंद करने से हिचकती हैं। क्योंकि शराब पर पाबंदी लगा दी जाए तो तस्करी का धंधा बढ़ जाता है।
जिससे सिर्फ राजस्व का नुकसान ही नहीं होता बल्कि जनता की सेहत से खिलवाड़ की आशंका बराबर बनी रहती है। बावजूद इसके तमिलनाडू नए मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय ने राज्य के भीतर पूजा स्थलों शिक्षण संस्थानो और बस स्टॉप के पास मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने का आदेश दे दिया है। नए सीएम के इस फरमान के बाद राज्य में शराब की 717 दुकाने बंद हो जाएंगी।
बंद होने वाली शराब की दुकानों में 276 पूजा स्थलों के पास मौजूद हैं जबकि 186 शिक्षण संस्थाओं के पास और 255 दुकाने बस स्टैंड के पास हैं। जिन्हें सीएम के आदेश के बाद बंद कर दिया जाएगा। हालांकि विपक्षी पार्टी डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिग कार्पोरेशन की दुकानो का हवाला देते हुए इसे महज सुर्खियों में रहने का स्टंट करार दिया है।

