उत्तराखंड मनरेगा कर्मियों को 4 महीने से नहीं मिला वेतन, कार्यबहिष्कार की दी चेतावनी

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उत्तराखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत 1232 कर्मचारियों के सामने पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इन कर्मचारियों को बीते जनवरी माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते उन्हें घर का राशन खरीदने से लेकर बच्चों की स्कूल फीस भरने और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मनरेगा संयुक्त संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि बकाया मानदेय का जल्द भुगतान नहीं हुआ और उनकी अन्य जायज मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे प्रदेश में मनरेगा कार्यों का संचालन ठप किया जा सकता है।

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फील्ड में तैनात कर्मचारियों की बढ़ती मुश्किलें और मांगें

राज्य में मनरेगा के लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारी फील्ड में तैनात हैं, जो दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर जियो टैगिंग, ऑनलाइन हाजिरी और ई-केवाईसी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन करते हैं। संगठन के प्रदेश सलाहकार शिवशंकर गुसाईं का कहना है कि बिना मानदेय मिले इन चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाना अब संभव नहीं रह गया है, खासकर नए शिक्षा सत्र में बच्चों के दाखिले के समय पैसों की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि न केवल उनका बकाया मानदेय तुरंत जारी किया जाए, बल्कि उन्हें फील्ड ड्यूटी के लिए यात्रा भत्ता और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की सुविधा भी प्रदान की जाए।

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विभाग का पक्ष और बजट में देरी का कारण

दूसरी ओर, संबंधित विभाग ने इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी होने में हो रही देरी को जिम्मेदार ठहराया है। राज्य समन्वयक सुधा तोमर ने जानकारी दी है कि मानदेय के भुगतान हेतु केंद्र सरकार से निरंतर पत्राचार किया जा रहा है और विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही बजट प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जैसे ही केंद्र से बजट उपलब्ध होगा, प्राथमिकता के आधार पर सभी कर्मचारियों का बकाया मानदेय तत्काल वितरित कर दिया जाएगा