देहरादून कोर्ट का बड़ा फैसला: वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बना संबंध दुष्कर्म नहीं, आरोपी फौजी बरी

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देहरादून की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति और स्वेच्छा से बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही स्पेशल पॉक्सो कोर्ट की जज मंजु सिंह मुंडे की अदालत ने शादी का झांसा देकर कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोपी एक सेवानिवृत्त फौजी को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है।

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अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। मामला देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र का है, जहाँ दो बच्चों की माँ और एक विधवा महिला ने पुनर्विवाह की इच्छा से एक नामी मैट्रिमोनियल साइट पर अपना बायोडाटा अपलोड किया था।

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अप्रैल 2023 में अल्मोड़ा निवासी आरोपी विमल थापा ने खुद को अविवाहित बताते हुए पीड़िता से संपर्क किया और कहा कि वह सेना से सेवानिवृत्त होकर वर्तमान में बीकानेर में नौकरी कर रहा है। इसके बाद पीड़िता उसके साथ बीकानेर गई और वहां से दून लौटते समय डाट काली मंदिर में आरोपी ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर शादी कर ली।

इसके बाद दोनों पटेलनगर स्थित किराए के मकान में करीब 15 दिनों तक साथ रहे, लेकिन बाद में फेसबुक चेक करने पर पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है, जिसके बाद अगस्त 2023 में पटेलनगर कोतवाली में केस दर्ज कराया गया था। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों को बालिग मानते हुए उनके बीच के संबंधों को पूरी तरह स्वैच्छिक और जबरन न होने के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।