देहरादून। उत्तराखंड का शिक्षा विभाग इस समय अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है और पूरा ढांचा प्रभारी अफसरों के भरोसे चल रहा है। प्रदेश के कुल 13 जिलों में से 10 जिलों में पूर्णकालिक मुख्य शिक्षा अधिकारी तैनात नहीं हैं, जिससे राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों की गति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
विभाग में अफसरों की तंगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऊधमसिंह नगर जिले में एक ही अधिकारी पर चार-चार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। वहां एक ही अधिकारी डीईओ (बेसिक), डीईओ (माध्यमिक), मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना अधिकारी का कामकाज संभाल रहे हैं।
ब्लॉक स्तर पर भी प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई हुई है। प्रदेश के कुल 95 विकासखंडों में से 54 विकासखंडों में खंड शिक्षा अधिकारी के पद खाली हैं। इसके अलावा, राज्य के सभी 13 जिलों में उप शिक्षा अधिकारियों के कुल 74 पद रिक्त पड़े हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्कूलों की निगरानी नहीं हो पा रही है।
प्रदेश में केवल तीन जिलों- टिहरी, पौड़ी और अल्मोड़ा में ही पूर्णकालिक मुख्य शिक्षा अधिकारी तैनात हैं। जबकि देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर समेत 10 जिलों में शिक्षा व्यवस्था प्रभारियों के सहारे ही चलाई जा रही है।
मैदानी जिलों से लेकर निदेशालय स्तर तक उच्च अधिकारियों की बड़ी कमी बनी हुई है। विभाग में पूर्णकालिक निदेशक के दोनों पद खाली पड़े हैं। इसके अतिरिक्त कुमाऊं और गढ़वाल में अपर शिक्षा निदेशक, सीमैट के अपर निदेशक और प्राथमिक-माध्यमिक निदेशालयों में भी शीर्ष अधिकारियों के पद रिक्त हैं।
इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा परिषद, महानिदेशालय और मध्याह्न भोजन योजना में संयुक्त शिक्षा निदेशकों तथा अपर सचिवों के कई महत्वपूर्ण पद पूरी तरह खाली हैं। उच्च स्तर पर अफसरों की इस गैर-मौजूदगी के कारण नीतिगत फैसलों और विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन अटका हुआ है।

