उत्तराखंड के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में से एक ‘लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी’ (LUCC) मामले में सीबीआई ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दो और मुख्य आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन उर्फ पंकज चौधरी के रूप में हुई है।
सीबीआई की देहरादून शाखा ने मुंबई की अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद दोनों को देहरादून लाकर विशेष बड्स एक्ट अदालत में पेश करने की तैयारी की है. इस धोखाधड़ी का जाल फैलाने के लिए सोसायटी ने उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और नैनीताल जैसे जिलों में करीब 35 शाखाएं खोली थीं।
वहां ऊंची ब्याज दरों, एफडी और आरडी के नाम पर निवेश कराने के लिए स्थानीय महिलाओं को ही एजेंट बनाया गया था, जिसके जरिए घरेलू महिलाओं और दिहाड़ी मजदूरों से करीब 800 करोड़ रुपये ऐठे गए। इस महाठगी में अब तक 7 आरोपी जेल जा चुके हैं. जांच एजेंसी ने आरोपियों की कई अचल संपत्तियों का पता लगा लिया है और पीड़ितों का पैसा वापस दिलाने के लिए इन संपत्तियों को कुर्क करने का ब्योरा उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को सौंप दिया है।
फिल्म अभिनेताओं के नाम से जीता था भरोसा
इस चिटफंड कंपनी ने आम लोगों को अपने झांसे में लेने के लिए एक बेहद सोची-समज्झी रणनीति अपनाई थी, जिसके तहत संचालकों ने खुद को भारत सरकार से मान्यता प्राप्त बताकर प्रचारित किया था. इतना ही नहीं, लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए श्रेयस तलपड़े और विजय राज जैसे नामचीन फिल्म अभिनेताओं को इसका ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था।
इन बड़े चेहरों को देखकर उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर कस्बों तक के लोगों ने आंख मूंदकर अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई इस सोसायटी में जमा कर दी थी. साल 2024 में जब लोगों ने अपने पैसे वापस मांगे तो कंपनी रातों-रात अपने दफ्तरों पर ताला लगाकर रफूचक्कर हो गई।
मुंबई से पकड़े गए दोनों आरोपी इस पूरे सिंडिकेट के बेहद महत्वपूर्ण मोहरे हैं, जिन्होंने मुख्य सरगना समीर अग्रवाल के साथ मिलकर साजिश रची थी और जनता से जुटाए गए करोड़ों रुपये को अलग-अलग फर्जी खातों में डायवर्ट करके सरगना को देश से बाहर भगाने में अहम भूमिका निभाई थी।
बोट ब्रो केस एसटीएफ को भेजने की तैयारी
इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल फिलहाल देश छोड़कर विदेश भाग चुके हैं और उनके खिलाफ सीबीआई लुकआउट सर्कुलर और अंतरराष्ट्रीय नोटिस जारी करवा रही है. इसी तरह का एक और मामला ‘बोट ब्रो’ कंपनी का सामने आया है, जिसने एलयूसीसी की तर्ज पर ही क्रिप्टो और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है और इसका दायरा भी करीब 400 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
बोट ब्रो का मुख्य सरगना लविश चौधरी और मास्टरमाइंड नवीन नेगी लगातार कंपनियों के नाम बदल-बदल कर लोगों को अपना शिकार बना रहे थे. नवीन नेगी तीन महीने पहले ही विदेश भाग गया, जबकि लविश चौधरी के खिलाफ मध्य प्रदेश, गोवा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में केस दर्ज होने के बावजूद वह उत्तराखंड में बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहा था।
इस मामले की गंभीरता और पीड़ितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला पुलिस ने रायपुर थाने में दर्ज इस मुकदमे की जांच एसटीएफ को ट्रांसफर करने की सिफारिश की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेज दी है, जहां एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार आदेश मिलते ही एसटीएफ अपनी तकनीकी और जमीनी जांच शुरू कर देगी.

