देहरादून। बद्रीनाथ धाम में चंदा चोरी का मामला इन दिनों प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मामले में चोरी के आरोप में कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और विभागीय जांच के साथ-साथ शासन स्तर पर भी जांच जारी है। इसके अलावा सक्षम जांच एजेंसियां भी पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। इसके बावजूद मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी लगातार राजनीतिक निशाने पर बने हुए हैं, जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
चर्चा इस बात की भी है कि जिस कर्मचारी पर चोरी के आरोप लगे और जिसकी गिरफ्तारी हुई, उसकी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जांच के जरिए चल रही है। ऐसे में बिना जांच पूरी हुए केवल मंदिर समिति के अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा करना क्या उचित है? राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह केवल जवाबदेही तय करने की कोशिश है या फिर किसी सोची-समझी रणनीति के तहत एक व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है।
हाल के दिनों में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने हेमंत द्विवेदी तल्ख़ टिप्पणी की थी । आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ और मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। हालांकि, जब अध्यक्ष की ओर से आरोपों का जवाब दिया गया तो कुछ स्वयंभू धर्म रक्षक और कथित धर्म के ठेकेदार यह नसीहत देते नजर आए कि पवित्र धाम और मंदिरों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि यदि मंदिर परिसर और धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक बहस से दूर रखना चाहिए, तो फिर इसकी शुरुआत सभी पक्षों से क्यों नहीं होती? यदि किसी पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए जाएंगे, तो स्वाभाविक रूप से उसे अपना पक्ष रखने का भी अधिकार होगा। ऐसे में केवल जवाब देने वाले को ही कटघरे में खड़ा करना दोहरे मापदंड की तरह देखा जा रहा है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या भूमिका तय करने का अधिकार जांच एजेंसियों का है, न कि राजनीतिक मंचों का। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न केवल न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि इससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
बद्रीनाथ धाम आस्था का केंद्र है। ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि पूरे प्रकरण में तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो, ताकि दोषियों को सजा मिले और निर्दोषों को अनावश्यक राजनीतिक विवादों से दूर रखा जा सके।

