अंकिता भंडारी मर्डर केस को चार साल हो चुके हैं। इस मामले में कई उतार चढ़ाए आए। लगातार आ रहे हैं उत्तराखंड की जनता कथित वीआईपी की जांच की बात कर रही है। जनता और अंकिता के माता-पिता को जिन पर शक है और जिसकी भूमिका की जांच की वे मांग कर रहे हैं। उनका भाजपा आलाकमान ने प्रदेश से तबादला कर दिया है। ताकि आग की आंच थोड़ी ठंडी पड़ जाए।
लेकिन फिर कुछ ऐसे काम हो रहे हैं कि राख में दबी चिंगार को हवा मिल रही है और वो शोला बन जा रही है। हालांकि अंकिता हत्याकांड में सीबीआई की जांच की संस्तुति सूबे के सीएम पुष्कर धामी कर चुके हैं लेकिन CBI जैसी तेज तर्रार जांच ऐजेंसी की रफ्तार कितनी तेज है उससे प्रदेश की जनता और विपक्ष हैरत में हैं। इस बीच जैसे ही भाजपा आलाकमान ने उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने की सूचना जारी की।
इस खबर से अंकिता भंडारी के माता-पिता नाराज हो गए । दोनो ने दिल्ली में इंडिया गेट के आगे धरना देकर नाराजगी जाहिर की और सरकार से मांग की, कि जबतक सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल न बनाया जाए। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि समूचा विपक्ष अंकिता के माता-माता की मांग को जायज ठहराने लगा और उनकी पैरवी करने लगा। इतना ही नहीं सिक्किम की जनता ने भी सोशल मीडिया पर दुष्यंत गौतम का विरोध करना शुरू कर दिया।
बहरहाल चुनावी साल की ओर बढ़ते उत्तराखंड में इसके असर को भांपते हुए गढ़वाल सासंद और भाजपा के राष्ट्रीय संयोजक अनिल बलूनी ने डैमेज कंट्रोल की पहल की है। बलूनी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ सीबीआई के अधिकारियों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि मुलाकात में सीबीआई अधिकारियों ने निष्पक्षता के साथ विवेचना करने का भरोंसा दिया है। होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा फिलहाल सबकी निगाहें सीबीआई की जांच की रफ्तार और दुष्यंत गोतम को लेकर केंद्र सरकार क्या कदम उठाती है इस पर टिकी हैं।

