अंकिता भंडारी हत्याकांड पर फिर गरमाई सियासत: कांग्रेस का दून में जोरदार प्रदर्शन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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देहरादून। उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर सियासत एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। गुरुवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने देहरादून में जोरदार प्रदर्शन करते हुए लोक भवन की ओर कूच किया। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले के खिलाफ किया गया था, जिसका सीधा असर राज्य की राजनीतिक सरगर्मी पर पड़ा है।

प्रदर्शन के दौरान जब कांग्रेस नेताओं ने महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई, तो मौके पर ज्ञापन लेने के लिए शासन या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था। अधिकारियों के न पहुंचने से आक्रोशित कांग्रेस नेताओं ने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी पिछले कई महीनों से राज्यपाल को ज्ञापन देने का प्रयास कर रही है, लेकिन उनकी आवाज को लगातार दबाया जा रहा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिन प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रशासनिक उपेक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राज्य के मुख्य विपक्षी दल का ज्ञापन तक स्वीकार नहीं किया जा रहा है, तो आम जनता की बुनियादी आवाज शासन तक कैसे पहुंचेगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक अपना कड़ा संघर्ष निरंतर जारी रखेगी।

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वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने भी ज्ञापन लेने के लिए किसी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर न पहुंचने पर तीखा रोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने के संवैधानिक अधिकार को भी कुचलने और कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जिसे उत्तराखंड की जनता और कांग्रेस पार्टी कतई सहन नहीं करेगी।