प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में हलाला की आड़ में एक नाबालिग से दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ी FIR को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। माननीय न्यायालय ने आरोपियों की ओर से आई दलीलों को खारिज करते हुए मामले को विस्तृत जांच के योग्य माना है। इस महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले का सीधा असर महिलाओं की गरिमा, समानता के अधिकारों और धार्मिक प्रथाओं के नाम पर होने वाले कथित शोषण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर पड़ेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए हलाला के नाम पर हुए इस कृत्य को बेहद गंभीर अपराध करार दिया। खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि वह फिलहाल हलाला प्रथा की संवैधानिकता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन इस केस की एफआईआर में जिन हालातों का जिक्र किया गया है, वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत देश के हर नागरिक को मिले गरिमा एवं समानता के मूल्यों पर गहरी चोट करते हैं।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह पूरा मामला एक विस्तृत और गहन जांच की मांग करता है, इसलिए अमरोहा के सैदनगली थाने में दर्ज आपराधिक प्राथमिकी को किसी भी कीमत पर रद्द नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि यदि इस मामले में आरोपियों को लेकर पहले से कोई अंतरिम आदेश जारी किया गया था, तो उसे भी अब तत्काल प्रभाव से समाप्त माना जाए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमरोहा के सैदनगली थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में पीड़िता ने अपनी आपबीती बताते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एफआईआर के अनुसार, पीड़िता का पहला निकाह 25 अप्रैल 2015 को आरोपी अजहर नवाज के साथ उसकी मर्जी के खिलाफ जबरन कराया गया था। निकाह के वक्त पीड़िता महज 15 साल की एक नाबालिग बच्ची थी, जिसके बाद से ही उसके साथ मारपीट का सिलसिला शुरू हो गया था।
तहरीर के मुताबिक, जनवरी 2016 में आरोपी अजहर नवाज ने तैश में आकर पीड़िता को तत्काल तीन तलाक दे दिया और उसे घर से निकाल दिया। हालांकि, कुछ महीनों के बाद आरोपी का मन बदला और वह उसे फिर से अपनी पत्नी (शरीके हयात) बनाने के लिए राजी हो गया। इसके लिए पीड़िता को नवंबर 2016 में जबरन एक हलाला निकाह की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरने पर मजबूर किया गया।
पीड़िता का यह पहला हलाला निकाह मौलाना कय्यूम के साथ बुलंदशहर के सियाना कस्बे में कराया गया था, जहां आरोप है कि हलाला के दौरान पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अप्रैल महीने में पीड़िता का दोबारा निकाह मुख्य आरोपी अजहर नवाज से कराया गया और साल 2018 में पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया।
बेटी के जन्म के बाद मुख्य आरोपी अजहर नवाज का रवैया फिर से पहले जैसा ही हिंसक हो गया और उसने जनवरी 2021 में पीड़िता को दूसरी बार तीन तलाक दे दिया। कुछ समय बाद आरोपी ने फिर से पीड़िता के सामने निकाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस बार आरोपियों द्वारा अजीब दलील दी गई कि चूंकि दो बार तलाक हुआ है, इसलिए नियमानुसार दो बार हलाला प्रक्रिया से गुजरना होगा।
एफआईआर में लगाए गए गंभीर आरोपों के अनुसार, इसी दोहरे हलाला के नाम पर 19 फरवरी 2025 को शहनवाज चौधरी और हकीम निशात नाम के व्यक्तियों ने पीड़िता के साथ जबरन दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। सैदनगली थाना पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी पति अजहर नवाज के साथ-साथ दुष्कर्म के आरोपी शहनवाज चौधरी और हकीम निशात को भी सह-अभियुक्त के रूप में नामजद दर्ज किया है, जिसकी जांच अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेजी से आगे बढ़ेगी।

