देहरादून। उत्तराखंड में बिजली कनेक्शन से जुड़े मामलों में उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर विद्युत लोकपाल ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हरिद्वार की निवासी आशा अग्रवाल के मामले की सुनवाई करते हुए लोकपाल ने स्पष्ट किया कि केवल आवश्यक दस्तावेजों की कमी को आधार बनाकर बिजली कंपनी किसी भी उपभोक्ता के नए कनेक्शन आवेदन को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकती।
विद्युत लोकपाल ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि नियमानुसार सुरक्षा राशि और शुल्क जमा कराकर आवेदक को अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में नया बिजली कनेक्शन जारी किया जाए।
दस्तावेज न होने पर ‘3 गुना सुरक्षा राशि’ का नया नियम
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सप्लाई कोड विनियम-2020 का हवाला देते हुए लोकपाल ने एक बेहद महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवेदक किन्हीं कारणों से कुछ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो बिजली कंपनी उससे सामान्य से तीन गुना सुरक्षा धनराशि लेकर नया बिजली कनेक्शन जारी कर सकती है। इसलिए दस्तावेजों के अभाव में आवेदन को लटकाना नियमों के पूर्णतः विरुद्ध है।
संपत्ति विवाद और बिजली कनेक्शन का कोई संबंध नहीं
यह पूरा मामला हरिद्वार के कनखल क्षेत्र स्थित सीताराम आश्रम ट्रस्ट की एक दुकान से जुड़ा है, जहां आशा अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से किराएदार हैं। उन्होंने 29 अगस्त 2024 और फिर 17 जनवरी 2026 को आवेदन किया था, लेकिन यूपीसीएल ने मकान मालिक के विरोध और कोर्ट में संपत्ति विवाद लंबित होने का बहाना बनाकर इसे रोक दिया था।
सुनवाई के बाद विद्युत लोकपाल ने पाया कि न्यायालय में लंबित मामला केवल संपत्ति विवाद और बेदखली से संबंधित है, जिसका बिजली कनेक्शन देने से कोई लेना-देना नहीं है। चूंकि कोर्ट ने महिला की बेदखली पर रोक लगाई हुई है, इसलिए वह परिसर की वैध कब्जाधारी मानी जाती हैं।
लोकपाल ने अपने विस्तृत आदेश में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा-43 का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके अनुसार, किसी भी परिसर के स्वामी या वैध कब्जाधारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर बिजली की निर्बाध आपूर्ति देना वितरण कंपनी की वैधानिक जिम्मेदारी है।
सुनवाई के दौरान यूपीसीएल के प्रतिनिधि ने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित दुकान पर पहले कभी कोई कनेक्शन नहीं था। इस पर लोकपाल ने स्पष्ट किया कि जब कोई पुराना कनेक्शन ही नहीं था, तो किसी भी प्रकार के पुराने बकाए बिल या देनदारी का प्रश्न ही नहीं उठता। विभाग को 15 दिनों में नया कनेक्शन चालू करना ही होगा।

