उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा रखने और उन्हें ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा न देने के गंभीर मामले पर राज्य प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के 4 प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों व जिला अस्पतालों के अधीक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
केंद्र सरकार की आगामी प्रस्तावित समीक्षा बैठक से पहले और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की नाराजगी के बाद, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की सीईओ रीना जोशी ने यह बड़ी कार्रवाई की है, जिसके तहत राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार मेडिकल कॉलेज, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज और सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज समेत विभिन्न जिला चिकित्सालयों के प्रबंधकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने मरीजों को ओपीडी में भीड़भाड़ और लंबी कतारों से परेशानी न हो, इसके लिए ‘स्कैन एंड शेयर’ व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत मरीज क्यूआर कोड स्कैन कर आभा आईडी के जरिए तुरंत ओपीडी पंजीकरण करा सकते हैं और अपना डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रख सकते हैं। इस सुलभ तकनीक में ‘ड्रिफकेस’ ऐप की मदद से एक बार पंजीकरण पूरा होने के बाद मरीजों को सीधे टोकन और त्वरित ऑनलाइन सेवा मिलती है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में यह योजना पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है।
स्थिति यह हो गई है कि दून अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों में भी हर रोज हजारों मरीजों की ओपीडी होने के बावजूद मंगलवार को 2,425 मरीजों में से मात्र 820 के ही ऑनलाइन पंजीकरण हो सके, जो यह दिखाता है कि अस्पताल इस जन-सुविधा को लागू करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं।
प्राधिकरण ने नोटिस में सख्त चिंता जताते हुए कहा है कि ओपीडी में भीड़ घटाने और मरीजों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

