उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की एक बेहद शानदार और प्रेरणादायक तस्वीर पेश की है, जो इंटरनेट पर तेजी से ट्रेंड कर रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आज देवभूमि की बेटियां और महिलाएं सामाजिक, आर्थिक, सुरक्षा, रोजगार और डिजिटल जैसे हर महत्वपूर्ण मोर्चे पर न केवल अपनी मजबूत धाक जमा रही हैं, बल्कि रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत भी लिख रही हैं।
इस सरकारी सर्वे के मुताबिक, अब उत्तराखंड के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं में अपने अधिकारों, शिक्षा और जीवन से जुड़े फैसलों को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता आई है। प्रदेश में अब मकान या जमीन जैसी अचल संपत्ति में मालिकाना हक रखने वाली महिलाओं का ग्राफ 16.5% से बढ़कर सीधे 23.7% पर पहुंच गया है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को रजिस्ट्री के स्टाम्प शुल्क में दी गई विशेष छूट का बहुत बड़ा और निर्णायक योगदान माना जा रहा है।
संपत्ति पर अधिकार बढ़ने के साथ-साथ परिवार के भीतर भी महिलाओं का सम्मान और उनकी अहमियत बढ़ी है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घरों के बड़े और महत्वपूर्ण पारिवारिक फैसले लेने के मामलों में महिलाओं की भागीदारी अब 91% से बढ़कर 93% हो गई है। यानी अब घर की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करने में महिलाओं की राय सर्वोपरि हो चुकी है।
डिजिटल और वित्तीय मोर्चे पर तो उत्तराखंड की महिलाओं ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जो डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर सच साबित करती है। पिछले सर्वे के मुकाबले इस बार इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में 31.8% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद यह आंकड़ा 45.1% से बढ़कर अब 76.9% के उच्च स्तर पर पहुंच गया है; ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति, इंटरनेट बैंकिंग और सोशल मीडिया पर रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज इस बदलाव के मुख्य कारक बनकर उभरे हैं।
इसके साथ ही, खुद का बैंक या बचत खाता इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 80.2% से बढ़कर सीधे 91.0% हो गया है, जबकि खुद का निजी मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी 60.9% से बढ़कर 72.5% हो गई है। रोजगार के मोर्चे पर भी बेटियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जहां पिछले 12 महीनों में काम करने वाली और नकद वेतन पाने वाली कामकाजी महिलाओं की संख्या 21.6% से बढ़कर 27.7% हो गई है, यानी कुल रोजगार में लगभग 6% का सीधा इजाफा हुआ है।
इस चौतरफा आर्थिक मजबूती और कानूनी सुरक्षा के चलते 18 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा में बड़ी गिरावट आई है, जो कि 15.3% से घटकर 13.7% रह गई है। हालांकि, इस रिपोर्ट में एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं का ग्राफ 2.1% से बढ़कर 3.5% हो गया है, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है और इस पर अभी और अधिक काम करने तथा सामाजिक चेतना जगाने की सख्त जरूरत है।

