मिलावटखोरी पर आखिर CM धामी को ही संभालना पड़ा मोर्चा, अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल….

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देहरादून। त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में मिलावटखोरी और जमाखोरी का खेल तेज हो गया है। ऐसे में जिस अभियान की जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी के कंधों पर होनी चाहिए थी, उसकी कमान आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुद संभालनी पड़ी। हालात को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी और सख्त निर्देश इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि जिलों में जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी रही है, इस पर सवाल उठना लाजिमी है।मिलावट और जमाखोरी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेशभर में सरकारी मशीनरी हरकत में आई और खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ जिला प्रशासन ने बाजारों में छापेमारी और निरीक्षण अभियान तेज कर दिया। सभी जिलाधिकारियों को एक सप्ताह तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मंडलायुक्तों को सौंपी गई है। सोमवार को प्रदेश के लगभग सभी जिलों में अभियान चलाया गया। व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने के साथ खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए। कई दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए, जबकि सड़े-गले और एक्सपायरी डेट के खाद्य पदार्थ मौके पर ही नष्ट कराए गए। टीमों ने केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि चीनी की जमाखोरी और घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल की भी जांच की।

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राजधानी देहरादून में भी जिला प्रशासन ने सोमवार को अभियान चलाते हुए 11 खाद्य नमूने एकत्र किए। तीन प्रतिष्ठानों को व्यवस्था में सुधार की चेतावनी दी गई। जिले में एक अगस्त से अब तक 70 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 48 सैंपल लिए जा चुके हैं, जबकि सर्वे के लिए 20 अलग सैंपल लिए गए हैं। 11 दुकानदारों को सुधार के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और एडीएम कोर्ट में चार वाद भी दर्ज कराए गए हैं।

हरिद्वार से लेकर पहाड़ तक कार्रवाई

हरिद्वार में 17 अगस्त से अभियान जारी है। अब तक 47 व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 27 सैंपल लिए गए हैं और 10 दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। चार मामले विभिन्न न्यायालयों में दर्ज कराए गए हैं।

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चमोली में तीन सैंपल लेकर लैब भेजे गए, जबकि एक्सपायरी डेट की सामग्री मिलने पर दो दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया। दो कंपनियों की पैकेजिंग और लेबलिंग मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर संबंधित निर्माताओं को भी नोटिस की कार्रवाई की जा रही है।

रुद्रप्रयाग में 12 दुकानों का निरीक्षण कर छह सैंपल लिए गए। छह दुकानों में एक्सपायरी डेट का सामान मिलने पर उसे नष्ट कराया गया। अल्मोड़ा में दो मिठाइयों के सैंपल लिए गए, जबकि बागेश्वर में आठ प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर तीन सैंपल लिए गए। पिथौरागढ़ में दो सैंपल लिए गए हैं।

चंपावत में एक अगस्त से अब तक 21 स्थानों का निरीक्षण किया गया है। इनमें 10 जगहों से सैंपल लेकर लैब भेजे गए हैं। पौड़ी में 10 सैंपल लिए गए, जिनमें छह जांच के लिए भेजे गए। नैनीताल में 10 दुकानों का निरीक्षण कर छह सैंपल लिए गए और मानकों के अनुरूप न मिलने पर 10 किलो मिठाई नष्ट कराई गई। टिहरी में सात प्रतिष्ठानों से छह सैंपल और उत्तरकाशी में 15 स्थानों के निरीक्षण के दौरान चार सैंपल लिए गए।

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अब सवाल यह है कि अगर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही प्रदेशभर में मिलावटखोरी के खिलाफ मशीनरी इतनी तेजी से सक्रिय हो सकती है, तो इससे पहले जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे? त्योहारों के मौसम में जनता की थाली और जेब दोनों को सुरक्षित रखना जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की नियमित जिम्मेदारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे मोर्चा संभालना सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े करता है। अब देखना होगा कि एक सप्ताह का यह अभियान सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है या वास्तव में मिलावटखोरों और जमाखोरों पर ऐसा चाबुक चलता है, जिसका असर आने वाले दिनों में बाजारों में दिखाई दे।

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