उत्तराखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का व्यक्तित्व रीतिकाल के कविवर बिहारी के दोहों से मेल खाता है। जैसे बिहारी के दोहों के बारे में कहा जाता है, कि सतसैया के दोहरे ज्यों नावक के तीर देखन में सीधन लगे घाव करे गंभीर। कुछ यही अंदाज है सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का। उनकी नीति,उनके काम करने की शैली और उनके अब तक लिए फैसले साबित करते हैं कि, राज्य के अब तक के सियासी इतिहास में पुष्कर सिंह धामी जैसा सीएम कोई नहीं है।
उनके सहासिक फैसलों लकीर उन्हें अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों से अलग बनाती है। जरूर कोई विकास पुरुष रहा होगा ,किसी के लिए जरूरी है का नारा लिखा गया होगा। लेकिन इन गुजरे पुष्कर युग के चार सालों को देखो तो साफ पता चल जाता है कि जो धाकड़ फैसलों की लकीर जो सीएम धामी ने खींच दी है उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। किस फैसले की मिसाल दें हर फैसला तो बेमिसाल है।
बहरहाल राज्य के 26 साल के इतिहास पर गौर फरमाइए तो आप पाएंगे कि ये पहला मौका है जब किसी आईएएस अधिकारी पर बर्खास्तगी की गाज गिरी है। जांच-पड़ताल हुई और फौरन एक्शन । ऐसे फैसले लेने के लिए बहुत साहस जुटाना होता है। क्योंकि कोई भी सरकार कभी नहीं चाहती कि आईएएस लॉबी से सीधी भिड़न्त हो। लेकिन राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साबित किया कि उनकी रगों में उस पिता का गर्म लहू बहता है जिसने सेना में शामिल होकर सरहद की हिफाजत की।
आज सैनिक के बेटे के कांधों पर मुख्यमंत्री के रूप में उत्तराखंड राज्य को संवारने सजाने और उसके हितों को महफूज रखने की जिम्मेदारी है तो वो भी बेखौंफ होकर उस मोर्चे पर डटा है। ताकि राज्य लुटेरे भ्रष्टाचारियों की गिद्द नजरों से बच सके। ऐसे गिद्दों से राज्य को बचाने के लिए जिससे भी टकराना होगा धाकड़ धामी टकराएगा और धुरंधर अंदाज में फैसले लेते हुए नजीर पेश करेगा।
हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में आईएएस अधिकारी के खिलाफ बर्खास्तगी का फैसले ने पूरे भारत के सामने नजीर पेश की है कि सीएम हो तो पुष्कर धामी जैसा। सीएम धामी ने हरिद्वार नगर निगम के भूमि घोटाले में लिप्त सभी अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया है। आरोपी आईएएस अधिकारी को बर्खास्त करने वाले फैसले की सिफारिश भारत सरकार के डीओपीटी को भेज दी है।
यानि केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को भेजी गई है। ताकि उनकी सिफारिश पर कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय अमल करे और दागी आईएएस को हमेशा अपने उन कर्मो का पछतावा रहे जिनकी वजह से उसका शानदार साहब वाला करियर बदनामी की मिट्टी में मिलकर खाक हो गया है ।
बहराहल सीएम धामी ने वो काम किया है जिसके लिए वो जाने जाते हैं जिसका उनकी सरकार ने उत्तराखंड की जनता से वादा किया था। यानि जीरो टॉलरेंस। जमीन घोटाले के आरोपी आईएएस पर लिए सीएम धामी की कार्रवाई से साबित हो गया है कि धामी राज में दागी की कोई माफी नहीं। कोई कितने भी बड़े पद पर क्यों न हो,राज्य और उसकी जनता से लूट की छूट किसी को नहीं मिलेगी।
धाकड़ धामी का भ्रष्टाचार के खिलाफ ये धुरधंर एक्शन पूरे देश मिसाल बन गया है । साफ है कि सीएम धामी बेशक दिखने में भले ही सीधे लगें लेकिन उनके फैसले उस तीर के माफिक काम करते हैं जो छोटा होने के बावजूद गहरे घाव कर देता है। बहरहाल चौक-चौराहों पर सीएम धामी के भूमि घोटाले के आरोपी आईएएस के खिलाफ लिए बर्खास्तगी के फैसले की चर्चा हो रही है. लोग कह धाकड़ धामी का इकबाल बुलंद रहे ताकि उत्तराखंड लुटेरों की नजरों से महफूज रहे।

