उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक बड़े हिस्से को पेयजल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख बांदल स्रोत का वाटर डिस्चार्ज लगातार घटने से शहर में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जल संस्थान के अनुसार, 20 एमएलडी की क्षमता वाले इस स्रोत से रविवार को केवल 8 एमएलडी पानी ही दर्ज किया गया, जिसने हजारों की आबादी के सामने पेयजल की किल्लत पैदा कर दी है। स्थिति से निपटने के लिए जल संस्थान ने पानी की सप्लाई का समय घटा दिया है, जिससे अब कई प्रभावित इलाकों में केवल सुबह या शाम को ही पानी मिल पा रहा है।
इस भीषण गर्मी के कारण राजपुर स्थित शहंशाही स्रोत और मसूरी की तलहटी के ग्लोगी स्रोत पर भी बुरा असर पड़ा है, जिसके चलते करनपुर, नेशविला रोड, डोभालवाला और अघोईवाला जैसे क्षेत्रों के ट्यूबवेलों पर भारी दबाव बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, बार-बार होने वाली बिजली की आंखमिचौनी ने ओवरहेड टैंकों को भरने की समस्या को और गंभीर बना दिया है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन जनरेटर की मदद ले रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।
बिलिंग कैंपों की अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल
शहर में बढ़ते पेयजल संकट को लेकर पूर्व विधायक राजकुमार ने जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह को ज्ञापन सौंपकर राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न इलाकों जैसे डीएल रोड, डालनवाला, चंदर रोड और कांवली रोड आदि में पानी की समस्या का तुरंत समाधान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो वे जनहित में धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
दूसरी ओर, महूंवाला क्लस्टर पेयजल योजना के तहत लगाए जा रहे बिलिंग कैंपों में भारी अव्यवस्थाओं और बिल वितरण में लापरवाही को लेकर स्थानीय उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। स्थानीय प्रतिनिधि वीरू बिष्ट का आरोप है कि बिल जमा करने की अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं तक अभी तक बिल नहीं पहुंच पाए हैं, जिसे लेकर उन्होंने पेयजल निगम की विश्व बैंक परियोजना इकाई की अधिशासी अभियंता को एक शिकायती ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।

