उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: अब एक ही शादी होगी मान्य, जल्द लागू होगा ‘नया निकाहनामा’

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देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद राज्य वक्फ बोर्ड एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाने जा रहा है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने घोषणा की है कि बोर्ड जल्द ही पूरे प्रदेश के लिए एक नया निकाहनामा जारी करेगा। इस नए निकाहनामे के तहत राज्य में अब केवल एक ही शादी को मान्यता दी जाएगी और पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति राज्य में कानून का उल्लंघन कर दूसरा निकाह करता है, तो उसे कानूनी प्रावधानों के तहत सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही, किसी भी मौलाना या काजी द्वारा दूसरा निकाह कराने पर भी सख्त पाबंदी होगी। नियम तोड़ने या दूसरा निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सजा का भागीदार बनाया जाएगा।

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शादाब शम्स ने बताया कि चूंकि पूरे प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है, इसलिए एक से अधिक विवाह करना अब गैर-कानूनी है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य की अधिकतर मस्जिदें और दरगाहें वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, इसलिए बोर्ड की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह यूसीसी के नियमों का सख्ती से पालन कराए। इसी उद्देश्य से निकाहनामे के प्रारूप में यह ऐतिहासिक बदलाव किया जा रहा है।

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नया नियम लागू होने के बाद प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव आएगा। वक्फ बोर्ड के तहत आने वाली सभी मस्जिदों के इमामों और काजियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि वे केवल नए निकाहनामे के आधार पर ही शादी संपन्न कराएं। पहली शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करने की कोशिशों पर पुलिस प्रशासन और वक्फ बोर्ड की कड़ी नजर रहेगी।

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नया निकाहनामा तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही पूरे उत्तराखंड में लागू कर दिया जाएगा। वक्फ बोर्ड के इस कड़े रुख से स्पष्ट हो गया है कि यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में किसी भी धार्मिक रीति-रिवाज की आड़ में कानून से इतर जाकर दूसरी शादी करने की इजाजत नहीं होगी। इस निर्णय को प्रदेश में महिला अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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