उत्तराखंड परिवहन विभाग ने 8.38 लाख चालान काट वसूला ₹62 करोड़ से अधिक का जुर्माना

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उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने, नियमों का उल्लंघन रोकने और टैक्स चोरी पर कड़ा प्रहार करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई को अंजाम दिया है। उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कुल 8,38,391 वाहनों के चालान काटे हैं।

इस दौरान बेहद गंभीर लापरवाही पाए जाने पर 18,001 वाहनों को मौके पर ही सीज कर दिया गया। इस व्यापक चेकिंग अभियान और पूरी कार्रवाई के तहत विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन स्वामियों से कुल 62.22 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना वसूला है, जो राज्य के राजस्व और सड़क सुरक्षा दोनों ही लिहाज से एक रिकॉर्ड कार्रवाई मानी जा रही है।

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कार्रवाई और जुर्माने में भारी बढ़ोतरी

परिवहन विभाग द्वारा जारी वर्षवार तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले इस साल की कार्रवाई में अभूतपूर्व उछाल आया है। साल 2024-25 में जहां कुल 3,92,303 वाहनों के चालान काटे गए थे, वहीं इस साल यह संख्या 118.77 प्रतिशत बढ़कर सीधे 8.38 लाख के पार पहुंच गई।

इसी तरह सीज किए गए वाहनों की संख्या में भी 41.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले साल 12,639 थी और इस साल बढ़कर 18,001 हो गई। प्रवर्तन टीमों की इस कड़ाई का सीधा असर जुर्माने की रकम पर भी दिखा है, जिसके परिणामस्वरूप कुल वसूला गया जुर्माना पिछले साल के 45.29 करोड़ रुपये से 37.07 प्रतिशत बढ़कर इस बार 62.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

सड़कों पर ऑटोमेटिक चालान का खौफ

राज्य में सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए लगाए गए एएनपीआर (ANPR) कैमरों का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में केवल इन आधुनिक कैमरों और हाई-टेक ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से ही रिकॉर्ड 4,93,544 ई-चालान ऑटोमेटिक तरीके से जनरेट किए हैं।

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इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर सक्रिय ऑटोमेटिक सिस्टम ने भी पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 20,000 वाहनों के चालान काटकर अपनी उपयोगिता साबित की है। यह पूरी डिजिटल प्रणाली मानवीय हस्तक्षेप के बिना सीधे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ रही है, जिससे चालान की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और तेज हो गई है।

इन कमियों पर तुरंत गिर रही गाज

इस हाई-टेक ई-डिटेक्शन सिस्टम के निशाने पर मुख्य रूप से वे कमर्शियल वाहन आ रहे हैं जिनका फिटनेस सर्टिफिकेट वैध नहीं है, या फिर जिन निजी वाहनों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) समय सीमा समाप्त होने के बाद भी खत्म हो चुका है। इसके साथ ही बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ भी यह सिस्टम तुरंत और ऑटोमेटिक तरीके से चालान जारी कर रहा है।

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परिवहन विभाग यहीं नहीं रुकने वाला है, बल्कि अगले चरण के तहत इस ऑटोमेटिक निगरानी प्रणाली का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा। विभाग की आगामी योजना के अनुसार, अब बिना परमिट के अवैध रूप से दौड़ने वाले वाहनों और बिना पीयूसी यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों पर भी इस सिस्टम के जरिए सीधे गाज गिराने की तैयारी पूरी कर ली गई है

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