उत्तराखंड: पेयजल योजनाओं का बिजली बिल होगा जीरो, सोलर एनर्जी से संचालन की बड़ी तैयारी

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देहरादून। उत्तराखंड में पेयजल योजनाओं के संचालन में होने वाले भारी-भरकम बिजली खर्च पर नकेल कसने के लिए शासन ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। देहरादून में शासन स्तर से पेयजल योजनाओं को सौर ऊर्जा से संचालित करने की व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी खजाने पर लगातार बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम करना है।

इसके तहत जल निगम और जल संस्थान मिलकर विभिन्न पेयजल परिसरों में सोलर पावर प्लांट स्थापित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना के धरातل पर उतरने से आने वाले समय में सालाना बिजली बिलों पर करीब 700 करोड़ रुपये की भारी बचत होने का अनुमान लगाया गया है।

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प्रदेश भर में जलापूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल, मल्टी स्टेज पंपिंग पेयजल योजनाओं के साथ-साथ बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में इन सभी संयंत्रों के संचालन पर हर साल लगभग 500 करोड़ रुपये की बिजली खर्च हो रही है। इस विशाल बिजली बिल का पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार द्वारा सीधे शासन स्तर से जारी बजट के माध्यम से उठाया जाता है।

आने वाले दिनों में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कई नई पेयजल योजनाएं शुरू होने जा रही हैं, जिससे बिजली की खपत और अधिक बढ़ने वाली है। अनुमान है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद सालाना बिजली का बिल बढ़कर 700 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इसी संभावित वित्तीय संकट से निपटने के लिए सरकार ने ग्रीन एनर्जी का सहारा लेने का निर्णय लिया है।

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इस योजना पर तेजी से अमल करते हुए शासन ने प्रारंभिक चरण में 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया है। बजट मिलते ही जल निगम और जल संस्थान ने सोलर पावर प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया है।

पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली के भारी बिलों को काफी हद तक नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थापित किए जा रहे सोलर प्लांट भविष्य में विभाग के लिए बेहद मददगार साबित होंगे।

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इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल सरकार को करोड़ों रुपये के बिजली बिलों से राहत मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बिजली कटौती के दौरान भी पेयजल योजनाओं का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा, जिससे जनता को निर्बाध पानी मिलता रहेगा।