देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे स्पेशल समरी रिवीजन अभियान के तहत मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच अब और तेज होगी। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले 11 प्रमुख अभिलेखों के समय पर सत्यापन के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बड़ा कदम उठाया है।
सचिवालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों के निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों को राज्यस्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त कर सीधे जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में आम नागरिकों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास, जाति, जन्म प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल जैसे अभिलेखों का सत्यापन तय सीमा के भीतर किया जाए।
डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि जिलों में तैनात नोडल अफसरों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर राज्य स्तर से इस पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि किसी भी मतदाता को बेवजह परेशानी न उठानी पड़े।
दस्तावेजों की जांच को पारदर्शी बनाने के लिए विभागों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। 10वीं-12वीं व अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा निदेशकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
वहीं स्थायी निवास, जाति प्रमाण पत्र और भवन आवंटन अभिलेखों के सत्यापन का जिम्मा राजस्व परिषद को दिया गया है। जन्म प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता जांचने के लिए शहरी विकास और स्वास्थ्य निदेशक को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है।
गांवों और शहरों से जुड़े परिवार रजिस्टर व भवन आवंटन के अभिलेखों की जांच पंचायतीराज निदेशक करेंगे। इसके अलावा, ऑनलाइन वेरिफिकेशन प्रक्रिया को सुचारू रखने की जिम्मेदारी आईटीडीए के निदेशक को दी गई है।
सचिवालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायतीराज और आईटीडीए के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

