लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने से मिले उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, समृद्ध विरासत पर हुई चर्चा

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उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने से एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार मुलाकात की। देहरादून से ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक के दौरान दोनों के बीच संस्कृत की प्राचीन और समृद्ध विरासत को लेकर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई।

इस खास मुलाकात में लिथुआनियाई राजदूत ने संस्कृत शिक्षा सचिव को एक विशेष शब्दकोश भी भेंट किया, जिसमें संस्कृत और लिथुआनियाई भाषाओं के 108 समान अर्थ वाले शब्दों का संकलन किया गया है, जो दोनों संस्कृतियों के ऐतिहासिक और भाषाई जुड़ाव को दर्शाता है।

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चर्चा के दौरान संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने उत्तराखंड में इस देवभाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य है जहाँ संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने भाषा को जमीनी स्तर पर जीवित रखने के लिए अभिनव पहल करते हुए प्रदेश के हर जिले में एक-एक ‘संस्कृत ग्राम’ स्थापित किया है। इस अनूठी योजना के तहत राज्य में कुल 13 संस्कृत ग्राम विकसित किए जा चुके हैं, जहाँ का स्थानीय समुदाय अपने दैनिक जीवन और बोलचाल में सक्रिय रूप से संस्कृत भाषा का प्रयोग करता है।

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इस बैठक में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने लिथुआनिया की राजदूत को उत्तराखंड के इन विशेष संस्कृत ग्रामों की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखने और वहां की अनूठी संस्कृति का अनुभव करने के लिए राज्य में भ्रमण करने का सादर आमंत्रित किया। इसके साथ ही, उन्होंने लिथुआनिया के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान प्रोफेसर वितिस विदूनास द्वारा वैश्विक स्तर पर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और अकादमिक क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान की खुले दिल से सराहना की।

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यह मुलाकात न केवल उत्तराखंड बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत भाषा के महत्व और उसके वैश्विक प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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