देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी विभागों पर बकाया 539.61 करोड़ रुपये के बिजली बिल को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। देहरादून में आयोजित यूपीसीएल और पिटकुल की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने साफ निर्देश दिए कि सभी विभागों से बकाये की वसूली के लिए तुरंत प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए।
समीक्षा बैठक में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और पिटकुल की वर्तमान वित्तीय स्थिति, लंबित देनदारियों और विकास कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले शीतकालीन सत्र में पूरे प्रदेश में बिना किसी कटौती के निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

सीएम धामी ने समीक्षा के दौरान अनुपूरक बजट में स्वीकृत राशि में से 166 करोड़ रुपये की शेष धनराशि तुरंत यूपीसीएल को जारी करने के आदेश दिए। इस कदम से बिजली निगम के पेंडिंग भुगतानों और चल रही विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी।
बैठक का सबसे बड़ा फैसला सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर रहा। केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) योजना के तहत पहले चरण में सभी सरकारी भवनों में लगे स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जाएगा। सीएम ने इस काम के लिए बजट आवंटन को प्राथमिकता देने और कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति व देनदारियों के बंटवारे पर भी बैठक में मंथन हुआ। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अंतरराज्यीय मामलों को तेजी से सुलझाकर लंबित देनदारियों का निस्तारण किया जाए, ताकि दोनों निगमों पर आर्थिक दबाव कम हो सके।

बैठक में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत दैवीय आपदा से प्रभावित कार्यों का भुगतान करने और ईपीसी कार्यों की लंबित राशि जारी करने पर भी निर्णय लिया गया। सीएम ने स्पष्ट किया कि राजस्व वसूली और वित्तीय अनुशासन ही बिजली निगमों की आर्थिक सेहत को सुधार सकता है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम समेत ऊर्जा विभाग के तमाम शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि आम जनता को निर्बाध बिजली देना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

