देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के आवास पर ईडी की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा अपने दायित्व से इस्तीफे की पेशकश किए जाने से कांग्रेस के सामने भी कई असहज सवाल खड़े हो गए हैं।
खास बात यह है कि रावत ने मध्यरात्रि में ही इस्तीफे की पेशकश कर दी, लेकिन अब कांग्रेस के नेताओं को इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब देना मुश्किल नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से मामले को करीब 10 साल पुराना बताकर सवालों से किनारा करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी मामले के पुराना हो जाने से उसकी गंभीरता भी खत्म हो जाती है?
अगर मामला पुराना है तो फिर कार्रवाई को लेकर इतनी बेचैनी क्यों दिखाई दे रही है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों का आकलन भी समय के हिसाब से किया जाना चाहिए? इसी मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से बातचीत की।
हरीश रावत की जल्दबाजी में इस्तीफे की पेशकश को लेकर सवाल पूछे जाने पर यशपाल आर्य ने कहा कि हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और आखिरकार उन्होंने यह फैसला जल्दबाजी में कैसे किया होगा, इस पर उनका कुछ कहना उचित नहीं होगा। यशपाल आर्य का यह जवाब भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
जब पार्टी के वरिष्ठ नेता खुद किसी कार्रवाई के बाद आधी रात में अपने दायित्व से इस्तीफे की पेशकश कर रहे हों, तो क्या पार्टी नेतृत्व को इस पर खुलकर स्थिति स्पष्ट नहीं करनी चाहिए? क्या कांग्रेस को यह बताने की जरूरत नहीं है कि रावत ने आखिर किस परिस्थिति में यह कदम उठाया?
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मामले को 10 साल पुराना बताते हुए ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतना पुराना मामला होने के बावजूद ईडी की यह कार्रवाई हुई है, जबकि सरकार पहले ही संबंधित परीक्षा को रद्द कर चुकी है। कांग्रेस के इस तर्क पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है कि परीक्षा रद्द होने के बाद पूरे मामले की जवाबदेही खत्म हो जाती है या फिर जांच का दायरा अपनी जगह बना रहता है? आखिर अगर कोई मामला पुराना है तो क्या जांच एजेंसियों को उस पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए?
चुनावी साल में सामने आया यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पार्टी मामले को पुराना बताकर बचाव करती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा इस्तीफे की पेशकश ने इस बचाव की रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण पर एक स्पष्ट और एकजुट जवाब कब देती है। क्योंकि सवाल सिर्फ ईडी की कार्रवाई का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक जवाबदेही का भी है, जिससे बचने की कोशिश अब कांग्रेस के लिए आसान नहीं दिख रही।

