Uttarakhand Police का ऑनलाइन FIR पोर्टल ठप, स्वास्थ्य प्राधिकरण से लाखों नागरिकों का डेटा लीक

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देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की ऑनलाइन FIR प्रणाली ठप होने और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का अति-संवेदनशील डेटा लीक होने का एक बड़ा मामला सामने आया है। राजधानी देहरादून से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों से उत्तराखंड पुलिस के सीसीटीएनएस पोर्टल पर ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने और स्थिति देखने की सुविधा पूरी तरह बंद है। इसके साथ ही 21 अगस्त की रात राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सिस्टम में सेंध लगाकर क्रेडेंशियल चुरा लिए गए हैं, जिससे आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड धारक लाखों कर्मचारियों व आम नागरिकों की गोपनीय जानकारी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

उत्तराखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिकों को घर बैठे एफआईआर दर्ज कराने और देखने की डिजिटल सुविधा मिलती है। हालांकि, गूगल सर्च या सीधे लिंक के जरिए जब उपयोगकर्ता ‘सीसीटीएनएस उत्तराखंड’ पोर्टल पर जा रहे हैं, तो उन्हें भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वेबसाइट का मुख्य लिंक तो खुल रहा है, लेकिन दर्ज प्राथमिकियों को देखने से जुड़ा ‘व्यू एफआईआर’ विकल्प तकनीकी खामी के कारण पूरी तरह काम नहीं कर रहा है।

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जांच और पड़ताल में सामने आया है कि पुलिस पोर्टल का एफआईआर सर्च पेज पूरी तरह से ठप है और स्क्रीन पर लगातार सर्वर एरर दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस का यह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक बार फिर बड़े साइबर हमले का शिकार हुआ है, जिससे सर्वर को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, वैकल्पिक लिंक पर स्पष्ट संदेश लिखा गया है कि तकनीकी कारणों से एफआईआर देखने की सेवा अस्थायी रूप से बंद रखी गई है।

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मामले पर पर्दा उठाते हुए सीसीटीएनएस व एसटीएफ के आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि पुराने लिंक का फायदा उठाकर साइबर ठग सीधे एफआईआर की कॉपियां निकाल रहे थे और नए अपराधों को अंजाम दे रहे थे। ठगों के इस गिरोह को रोकने के लिए ही सुरक्षा कारणों से पुराने डायरेक्ट लिंक को प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने साफ किया कि अब केवल पीड़ित पक्ष ही यूजर लॉगिन करके अपनी एफआईआर देख सकेंगे। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2023 में भी इस सिस्टम पर साइबर हमला हो चुका है।

दूसरी ओर, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के डेटाबेस में हुई सेंधमारी ने शासन की नींद उड़ा दी है। प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ देने वाले इस प्राधिकरण के सिस्टम से 21 अगस्त की रात करीब 10:30 बजे क्रेडेंशियल डेटा कॉपी कर लिया गया। सिस्टम में तुरंत डेटा चोरी का अलर्ट जारी हुआ, जिसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी ने स्वास्थ्य प्राधिकरण के आला अधिकारियों से इस लापरवाही पर तुरंत जवाब तलब किया है।

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डेटा लीक के इस गंभीर मामले में स्वास्थ्य प्राधिकरण के अपर निदेशक अमित शर्मा ने बताया कि जिस समय क्रेडेंशियल कॉपी होने का अलर्ट आया, उस वक्त कार्यालय बंद था। आईटीडीए ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल इस बिंदु की गहन जांच की जा रही है कि क्या कोई संदिग्ध व्यक्ति दफ्तर के अंदर दाखिल हुआ था या फिर साइबर अपराधियों ने रिमोट एक्सेस के जरिए सिस्टम को हैक करके लाखों लोगों का डेटा चुराया है।