देहरादून। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चूना लगाने के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है। राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अधिकारियों की सांठगांठ से राजस्व को पहुंचाया गया नुकसान किसी की ‘निजी सूचना’ नहीं हो सकता। सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने इसे जनहित का गंभीर मामला मानते हुए लोक सूचना अधिकारी को एक हफ्ते के भीतर पूरी रिपोर्ट और दस्तावेज पेश करने का कड़ा आदेश दिया है।
यह पूरा मामला ऊधमसिंह नगर जिले के खैराना गांव से जुड़ा है, जहां के निवासी अमरजीत सिंह ने RTI के तहत एक ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन की जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने इसे ‘थर्ड पार्टी की निजी सूचना’ बताकर दबाने की कोशिश की। इसके बाद पहली अपील में भी कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा।
आयोग की सुनवाई में जो खुलासा हुआ, उसने विभागीय साठगांठ की पोल खोलकर रख दी। जिस व्यक्ति के नाम पर ट्यूबवेल का बिजली कनेक्शन जारी किया गया था, उसका भूमि के किसी भी सरकारी दस्तावेज में नाम दर्ज ही नहीं है। यही नहीं, इस फर्जी कनेक्शन पर पहले 2.30 लाख रुपये का बिल बनाया गया, जिसे बाद में घटाकर केवल 70 हजार रुपये कर दिया गया। विभागीय मेहरबानी का आलम यह रहा कि इस 70 हजार के बिल में से भी महज 15 हजार रुपये जमा करवाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान जब सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने विभागीय अधिकारियों से पूछा कि किस नियम और टैरिफ के तहत 2.30 लाख का बिल घटाकर 15 हजार किया गया, तो अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। अधिकारी न तो टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया बता पाए और न ही वर्तमान में लागू बिलिंग व्यवस्था को लेकर आयोग के सामने कोई स्पष्टीकरण दे सके।
सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने अधिकारियों के गोलमोल जवाबों पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और राजस्व हानि की ओर इशारा करता है। अधिकारियों द्वारा सूचना छिपाने की कोशिश से यह अंदेशा और गहरा जाता है कि इस पूरे खेल में नीचे से ऊपर तक विभागीय मिलीभगत शामिल है।
राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई सभी जानकारियों के लिखित जवाब एक सप्ताह के भीतर दिए जाएं। इसके साथ ही आयोग ने बिजली बिल तय करने की वर्तमान व्यवस्था की पूरी विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आयोग के समक्ष पेश करने के सख्त आदेश जारी किए हैं।

