नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग से कड़े सवाल पूछे हैं। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने विभाग को निर्देश दिया है कि स्थानांतरण का आधार बने दिव्यांगता प्रमाण पत्रों और पहाड़-मैदान के वर्गीकरण के तय मानकों की विस्तृत जानकारी अदालत में पेश की जाए।
अदालत के इस कड़े आदेश के बाद कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अपर निदेशकों सहित शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यह जनहित याचिका अल्मोड़ा जिले के सल्ट निवासी जीवन सिंह द्वारा दायर की गई है, जिन्होंने पहाड़ी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया है।
याचिकाकर्ता जीवन सिंह ने अदालत को बताया कि दूरस्थ क्षेत्र में स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डाभर में शिक्षकों के पद पहले से ही रिक्त चल रहे हैं। उनके बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं और यदि यहाँ से और शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया, तो विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक जाएगा।
याचिका के आंकड़ों के मुताबिक, डाभर के इस स्कूल में कुल सात सहायक अध्यापक तैनात हैं, जिनमें से चार अध्यापकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन कर दिया है। अदालत में आशंका जताई गई कि यदि इन चार अध्यापकों का स्थानांतरण मंजूर हो गया, तो विद्यालय में केवल तीन ही शिक्षक बचेंगे। इससे स्कूल में शिक्षकों का संकट गहरा जाएगा और बच्चों की पढ़ाई पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।
जनहित याचिका में उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 17(1)(b) का हवाला दिया गया है। इसके तहत अनुरोध पर होने वाले स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया केवल विधिवत गठित ‘स्थानांतरण समिति’ के माध्यम से ही पूरी की जानी चाहिए।
दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह नीति के तहत हुई है। सरकार के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को पर्वतीय क्षेत्रों में और मैदानी क्षेत्रों के शिक्षकों को मैदानी क्षेत्रों में ही स्थानांतरित किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अब शिक्षा विभाग से पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों के निर्धारण के स्पष्ट मापदंडों की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही स्थानांतरण का आधार बने सभी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की सत्यता की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

