Uttarakhand: अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें ठप, उत्तराखंड शासन का बड़ा एक्शन प्लान

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और कैंसर संस्थानों में जनता के टैक्स के पैसे से खरीदी गई करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक मशीनों की बर्बादी पर शासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में ₹50 लाख या उससे अधिक कीमत वाले चिकित्सा उपकरणों का ऑडिट करने का एक बड़ा फैसला लिया है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय कुमार आर्य ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एक तय प्रारूप में विस्तृत जानकारी तलब की है। शासन के इस कड़े रुख का सीधा असर अस्पतालों में धूल फांक रही महंगी मशीनों को दोबारा चालू करने और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मुहैया कराने पर पड़ेगा।

शासन को लगातार इस तरह की गंभीर शिकायतें मिल रही थीं कि कई सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की महंगी मशीनें या तो बहुत कम इस्तेमाल हो रही हैं या फिर तकनीकी खराबी के चलते लंबे समय से बंद पड़ी हैं। यानी जिन उपकरणों पर जनता का पैसा खर्च हुआ था, उनका वास्तविक लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा था।

अब इसी लापरवाही को रोकने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए विभाग ने गहन पड़ताल शुरू कर दी है। इसके तहत अब प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज को हर उपकरण का नाम, उसकी सही कीमत, निर्माता कंपनी का विवरण और स्थापना की तारीख की सटीक जानकारी शासन को देनी होगी।

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इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि वह मशीन वर्तमान में किस विभाग में सक्रिय है, उससे रोजाना कितने मरीज लाभान्वित हो रहे हैं और उस मशीन की निगरानी की जिम्मेदारी किस अफसर के पास है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब अस्पतालों में अफसरों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रदेश के हर चिकित्सा संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह नोडल अधिकारी सीधे तौर पर यह सुनिश्चित करेगा कि अस्पताल में मशीनें हर समय उपलब्ध रहें, सही तरीके से चलें और उनका नियमित रखरखाव किया जा रहा हो।

देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने इस व्यवस्था के तहत तत्काल कदम उठाते हुए एमएस प्रो. डॉ. अनुराग बिष्ट को नोडल अधिकारी की अहम जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल के सभी विभागाध्यक्षों से महंगी मशीनों का विस्तृत विवरण मांगा है।

गौरतलब है कि दून मेडिकल कॉलेज की कुछ बेहद महंगी मशीनें पहले से ही अपनी कम उपयोगिता को लेकर विवादों में बनी हुई हैं। अस्पताल का करीब ₹1.5 करोड़ की लागत वाला आधुनिक न्यूमेटिक ट्यूब सिस्टम लंबे समय से बंद है, जिससे मरीजों के नमूनों (Samples) के तेजी से आदान-प्रदान की व्यवस्था ठप पड़ी है।

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इसके अलावा, अस्पताल में मौजूद लगभग ₹70 लाख की भारी-भरकम लागत वाली एंडोस्कोपी मशीन के कथित तौर पर बेहद कम उपयोग किए जाने पर भी अक्सर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से आई हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी मशीन का इस्तेमाल भी सीमित मरीजों तक ही सिमटा हुआ है।

अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, इन मशीनों के पूरी क्षमता से संचालित न हो पाने की सबसे बड़ी वजह अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी होना है। स्टाफ की इस कमी के कारण करोड़ों की मशीनें होने के बावजूद मरीजों को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इस पड़ताल और नियमित निगरानी के शुरू होने से अस्पतालों में लंबे समय से खराब या निष्क्रिय पड़ी चिकित्सा मशीनों को दोबारा चालू कराने का प्रशासनिक दबाव काफी बढ़ेगा। जब ये मशीनें नियमित रूप से चलेंगी, तो सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों की गंभीर जांच समय पर सुनिश्चित हो सकेगी।

जांच समय पर होने से मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अलावा, जब सरकारी अस्पताल में ही सभी आधुनिक जांचें हर समय उपलब्ध रहेंगी, तो गरीब मरीजों को मजबूरी में महंगी निजी जांच प्रयोगशालाओं का रुख नहीं करना पड़ेगा।

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इस नई नीति के तहत हर मशीन के लिए एक जिम्मेदार अफसर तय होगा, जिससे मशीन में खराबी आने या उसका कम उपयोग होने पर संबंधित विभाग से सीधे जवाब मांगना आसान होगा। सरकार को यह भी स्पष्ट पता चलेगा कि कौन-सी मशीनें कम इस्तेमाल हो रही हैं और उनके पीछे की वास्तविक वजह क्या है।

दूसरी ओर, मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए दून अस्पताल के एकीकृत निदान केंद्र (Integrated Diagnostic Centre) में अब जांच के साथ-साथ खानपान संबंधी विशेषज्ञ परामर्श भी देने की अनूठी व्यवस्था शुरू की गई है। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए प्रसिद्ध डायटीशियन ऋचा कुकरेती की विशेष रूप से तैनाती कर दी है।

डायटीशियन ऋचा कुकरेती अब अस्पताल के आईपीडी भवन में बने निदान केंद्र में अपनी नियमित सेवाएं प्रदान करेंगी। इस नई व्यवस्था से अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ-साथ बाहर से अपनी पैथोलॉजी जांच कराने आने वाले सामान्य मरीजों को भी विशेषज्ञों से डाइट संबंधी महत्वपूर्ण सलाह मिल सकेगी।

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