देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून समेत विभिन्न जिलों में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का एक डरावना खेल सामने आया है। विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में राज्यभर से जांचे गए खाद्य पदार्थों के 4,909 नमूनों में से 524 सैंपल असुरक्षित, सब-स्टैंडर्ड या मिसब्रांडेड पाए गए हैं। यानी जांच में हर नौवां खाद्य नमूना पूरी तरह फेल साबित हुआ है।
राजधानी देहरादून में पनीर, मावा और सिंथेटिक दूध की आड़ में मिलावटखोरों का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। जिले में खाद्य कारोबार से जुड़े करीब 23 हजार प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि पिछले सात महीनों में केवल 400 दुकानों से ही सैंपल लिए जा सके हैं, जिससे विभाग की चेकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मिलावट के इस कारोबार को बढ़ावा देने में मांग और आपूर्ति का बड़ा अंतर मुख्य कारण है। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और शादियों के सीजन में दूध व पनीर की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय उत्पादन कम होने की वजह से उत्तर प्रदेश और हरियाणा से रोजाना क्विंटल के हिसाब से पनीर व मावा आता है, जिसकी प्रॉपर क्वालिटी जांच न होने से नकली सामान बाजार में खप रहा है।
विधानसभा में रखे गए 3 सालों के बजटीय आंकड़े स्थिति की गंभीरता बयां करते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1627 सैंपल में से 170 फेल हुए, 2024-25 में 1684 में से 159 नमूने अधोमानक मिले, और 2025-26 में अब तक 1598 सैंपलों की लैब जांच में 194 सैंपल पूरी तरह फेल आ चुके हैं। भारी जुर्माने के बावजूद ज्यादा मुनाफे के लालच में यह नेटवर्क टूट नहीं पा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई की बात करें तो देहरादून में अप्रैल से अक्टूबर के बीच लिए गए 423 नमूनों में से 22 फेल पाए गए। खाद्य सुरक्षा विभाग ने 106 कारोबारियों को नोटिस जारी किए हैं और एडीएम कोर्ट में सुनवाई के बाद 24 मामलों में 1.27 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा हाल ही में रुड़की में प्रतिबंधित एनालॉग पनीर बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में पामोलिन ऑयल व पाउडर जब्त किया गया था।
सहायक आयुक्त मनीष सयाना ने बताया कि एनालॉग पनीर पर बैन के बाद से विभाग की टीमें बॉर्डर इलाकों और बाजारों में लगातार चेकिंग अभियान चला रही हैं। मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, जिस रफ्तार से मिलावटी उत्पाद बाजार में पहुंच रहे हैं, उसे रोकने के लिए जांच का दायरा और कड़ा करने की जरूरत है।

