मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर ट्रैफिक सिस्टम हुआ शोपीस: ₹11 लाख के सिग्नल 2 साल से बंद, लग रहा भारी जाम

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देहरादून। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल लाइब्रेरी चौक पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। यहाँ लगभग 11 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल पिछले दो सालों से बंद पड़े हैं, जिससे वीकेंड और पर्यटन सीजन में वाहनों का भारी जाम लग रहा है।

लाइब्रेरी चौक मसूरी का मुख्य केंद्र है, जहाँ से देहरादून रोड, मालरोड, कैंपटी फॉल मार्ग और मोतीलाल नेहरू मार्ग के लिए गाड़ियाँ गुजरती हैं। चौराहे पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है, लेकिन सिग्नल बंद होने की वजह से वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर अपनी मर्जी से आगे बढ़ते हैं, जिससे हर समय अव्यवस्था फैली रहती है। करीब दो साल पहले व्यापारियों और होटल व्यवसायियों की मांग पर जिलाधिकारी की बैठक में यह फैसला लिया गया था। इसके बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने 11 लाख रुपये खर्च कर चौराहे पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल स्थापित करवाए थे।

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स्थानीय निवासियों उत्तम सिंह, विशाल सिंह, राजवीर और संजय सिंह का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इन सिग्नलों का नियमित संचालन नहीं किया जा रहा है। कभी-कभी लाइटें जलती तो हैं, लेकिन वे ट्रैफिक कंट्रोल करने के काम नहीं आतीं, जिससे चौराहे पर अक्सर हादसों और बहस की स्थिति बनी रहती है।

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स्थानीय व्यापारियों और नागरिक प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो इन सिग्नलों को तुरंत चालू कराया जाए, या फिर सप्ताहांत पर यातायात संभालने के लिए चौराहे पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की स्थाई तैनाती सुनिश्चित की जाए। गांधी चौक स्थित होटल व्यवसायी आशीष गोयल ने बताया कि वीकेंड पर जब देश भर से हज़ारों सैलानी मसूरी पहुँचते हैं, तब पुलिस बल की कमी और बंद सिग्नलों के कारण यहाँ घंटों लंबा जाम लग जाता है, जिससे पर्यटन व्यवसाय पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

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इस प्रशासनिक लापरवाही पर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब सरकारी खजाने का 11 लाख रुपया जनता की सुविधा के लिए खर्च किया गया था, तो यह सिस्टम शोपीस बनकर क्यों रह गया है? पूरे मामले पर प्रशासनिक पक्ष रखते हुए प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह गहलावत ने बताया कि गांधी चौक पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों की वर्तमान स्थिति का जल्द ही भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद लाइटों को सुचारू रूप से संचालित करने के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।