उत्तराखंड: बिजली उपभोक्ताओं की अनदेखी पर UPCL अधिकारियों को फटकार, निदेशक के वेतन से कटेगा जुर्माना

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देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने वाले आदेशों की अनदेखी करने पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के शीर्ष अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। देहरादून में आयोग ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमएल आर्य पर 25 हजार रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया है, जिसे उनके वेतन से काटा जाएगा।

नियामक आयोग की इस सख्त कार्रवाई से ऊर्जा निगम के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आदेशों का समय पर पालन न होने और उपभोक्ता जनहितों से जुड़े सुधारों में बरती गई शिथिलता के चलते आयोग को यह कठोर प्रशासनिक कदम उठाना पड़ा है। विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025-26 के टैरिफ आदेश में यूपीसीएल को बिजली सप्लाई सिस्टम में व्यापक सुधार करने के कड़े निर्देश दिए गए थे। इसके तहत निगम को सरकारी विभागों में फंसी करोड़ों की बकाया राशि की वसूली करनी थी।

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आदेश में तय समय सीमा के भीतर स्मार्ट मीटर लगाने और सभी उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिलिंग व्यवस्था शुरू करने के निर्देश भी शामिल थे। साथ ही कमर्शियल डायरी तैयार करने और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन लॉस (वितरण हानि) को कम करने का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि, आयोग द्वारा की गई समीक्षा बैठक में यह उजागर हुआ कि यूपीसीएल प्रबंधन ने जनहित और उपभोक्ता सुविधाओं से जुड़ी इन सभी महत्वपूर्ण शर्तों का पालन करने में घोर लापरवाही बरती है। कर्मचारियों के एस्टेब्लिशमेंट और लाभ से जुड़े मामलों का निस्तारण भी अटका कर रखा गया था।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए नियामक आयोग ने यूपीसीएल के तत्कालीन एमडी अनिल कुमार, निदेशक वित्त कमल शर्मा, निदेशक परिचालन एमआर आर्य और ईडी एचआर आरजे मलिक को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए समन किया था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन एमडी अनिल कुमार और निदेशक वित्त कमल शर्मा अपने पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई वित्तीय या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जा सकी।

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वहीं, ईडी एचआर आरजे मलिक के संदर्भ में समीक्षा करने पर उन पर कोई सीधा दोष सिद्ध नहीं हुआ, जिससे आयोग ने उन्हें किसी भी प्रकार की कार्रवाई से मुक्त रखा है। पूरे प्रकरण में आयोग ने पाया कि टैरिफ आदेशों और पावर सप्लाई सुधार के अनुपालन की मुख्य जिम्मेदारी निदेशक परिचालन पर थी। इसी आधार पर निदेशक परिचालन एमआर आर्य को मुख्य रूप से उत्तरदायी ठहराते हुए उनके वेतन से 25 हजार रुपये जुर्माना वसूलने के निर्देश जारी किए गए हैं।