देहरादून। उत्तराखंड को दुनिया का सबसे बड़ा एडवेंचर और इको-टूरिज्म हब बनाने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश में पहली बार एक मुकम्मल ‘पर्वतारोहण और ट्रैकिंग नीति’ लागू होने जा रही है। सोमवार को देहरादून सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन और पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की।
बैठक में मुख्य सचिव ने इस नई नीति के ड्राफ्ट को आगामी अगस्त महीने तक हर हाल में कैबिनेट के सामने पेश करने का समय तय कर दिया है। इस ऐतिहासिक नीति का सीधा असर उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग, ट्रेकिंग एजेंसियों और पहाड़ों में रहने वाले हजारों गाइड व स्थानीय युवाओं के रोजगार पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए वनों से स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करना है।
ट्रैकर्स के लिए खुलेंगी नई चोटियां, प्रदूषण बोर्ड करेगा ऑडिट
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि राज्य में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ट्रैकिंग के लिए नई चोटियों को चिह्नित कर तुरंत खोला जाए। इसके लिए सरकारी कागजी कार्रवाई और जरूरी प्रशासनिक अनुमतियों की प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन चोटियों का त्वरित ‘प्रदूषण ऑडिट’ कर जल्द से जल्द रिपोर्ट शासन को सौंपने को कहा गया है। आपको बता दें कि वर्तमान में उत्तराखंड में सिर्फ 83 चोटियों पर ही ट्रैकिंग और पर्वतारोहण की अनुमति है।
ट्रैकिंग की बुकिंग अब 100% ऑनलाइन
पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और पर्यटकों की सुविधा के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब वन क्षेत्र के भीतर होने वाली तमाम गतिविधियों और बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि वन विभाग के तहत आने वाली सभी माउंटेनियरिंग साइट्स, ट्रैकिंग रूट्स और वन विश्राम गृहों की बुकिंग अब केवल ऑनलाइन मोड पर ही की जाएगी। इसके अलावा, मसूरी के मशहूर ‘जबरखेत मॉडल’ की तर्ज पर राज्य के 9 नए टूरिस्ट स्पॉट्स को इको-टूरिज्म के लिए विकसित किया जा रहा है, जिनका लोकार्पण अक्टूबर में होगा।
नेचर गाइडों के लिए बनेगा स्थायी ट्रेनिंग सेंटर
पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं को प्रोफेशनल बनाने के लिए उत्तराखंड में पहली बार ‘नेचर गाइड प्रशिक्षण’ के लिए एक स्थायी ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा। इसके लिए बकायदा एक आधुनिक पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुरुप केंद्र सरकार के मौजूदा कोर्स के साथ कुछ नए मॉड्यूल जोड़कर अक्टूबर से यह सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।
राज्य के 31 चिह्नित स्थानों पर स्थानीय युवाओं की मदद से इको कैंप चलाए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग और वन निगम को एक महीने के भीतर संयुक्त प्लान देने को कहा गया है। वन निगम को आर्थिक रूप से ज्यादा पावरफुल बनाने के लिए भी एक अलग प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में भेजा जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में नीति निर्धारण के लिए वन प्रमुख कपिल लाल, सचिव वन सी. रविशंकर, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, पीसीसीएफ नीना ग्रेवाल और अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

