देहरादून। उत्तराखंड राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के गबन और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि विकास के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने और 5 साल तक कोई काम न करने के आरोप में ‘नेकॉफ’ कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। परियोजना निदेशक आनंद शुक्ल के कड़े निर्देश पर देहरादून के थाना नेहरू कॉलोनी में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इस महा-घोटाले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पैसा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और गरीब काश्तकारों की आमदनी दोगुनी करने के लिए जारी हुआ था। सरकार ने इसके लिए ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग को-ऑपरेटिव ऑफ इंडिया लिमिटेड’ को सहयोगी एजेंसी चुनकर पायलट प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी थी।
इन बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज
सरकारी धन की इस खुली लूट और धोखाधड़ी के मामले में नेहरू कॉलोनी थाने में जिन अधिकारियों के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज करने की तहरीर दी गई है। तहरीर के अनुसार, विपण कुमार कोहली (डायरेक्टर, नेकॉफ), आरएन शर्मा (राज्य प्रबंधक), सुधाकर तिवारी (जोनल मैनेजर) और अजय कुमार (सहायक राज्य प्रबंधक) का नाम शामिल हैं।
कागजों पर सिमटा प्रोजेक्ट, डकार गए करोड़ों रुपये
विभागीय जांच में सामने आया है कि टिहरी की मौगी सहकारी समिति ने 70 एकड़ अनुपयोगी भूमि को लीज पर लेकर संयुक्त सहकारी खेती का एक प्रस्ताव तैयार किया था। इस काम के लिए समिति को ₹1.28 करोड़ से अधिक की राशि मिली थी, जिसमें से नेकॉफ कंपनी को ₹71 लाख 90 हजार 319 ट्रांसफर किए गए थे। लेकिन 5 साल बीतने और कई बार नोटिस मिलने के बाद भी कंपनी ने धरातल पर ₹1 का काम नहीं किया और न ही सरकारी पैसा लौटाया।
इन 9 सहकारी समितियों से भी ऐंठे पैसे
जांच में खुलासा हुआ है कि नेकॉफ ने ई-एमसीपी योजना के तहत नई सहकारी संस्थाओं से लिए गए धन में भी भारी वित्तीय हेराफेरी की। कंपनी ने 8 से अधिक समितियों से तय सीमा से ज्यादा यानी करीब ₹75.82 लाख रुपये ले लिए। जिन प्रमुख समितियों से फ्रॉड किया गया उनमें एमपैकस गरुड़ (बागेश्वर), जिला सहकारी विकास संघ (चमोली), फल एवं साग-भाजी सहकारी क्रय-विक्रय समिति (चकराता,देहरादून), टनकपुर क्रय-विक्रय समिति लिमिटेड (चम्पावत), सीमांत सहकारी संघ लिमिटेड (चमोली), डीसीडीएफ (देहरादून), मंगलोर क्रय-विक्रय समिति (हरिद्वार), जिला भेषज एवं सहकारी विकास संघ लिमिटेड (टिहरी गढ़वाल) और केंद्रीय उपभोक्ता भंडार (उत्तरकाशी) जैसी समितियां शामिल हैं।
परियोजना निदेशक आनंद शुक्ल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी रिपोर्ट सहकारिता सचिव के सामने पेश की थी। सहकारिता सचिव की हरी झंडी मिलते ही पुलिस केस दर्ज करने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। निदेशक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि किसानों और सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली किसी भी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कानूनी सजा दिलाई जाएगी।

