Uttarakhand: 150 लखपति दीदियों को मिलेगा ब्याज मुक्त लोन, धामी सरकार का ‘भुली’ कार्यक्रम

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देहरादून। उत्तराखंड में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सफल उद्यमी बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। देहरादून में राज्य के ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने एक विशेष ‘चैलेंज फंड’ की शुरुआत की है। इस अनूठी योजना के तहत प्रदेश की 150 चयनित लखपति दीदियों को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए ₹3.58 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त आसान ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर मजबूती मिलेगी।

इस महत्वपूर्ण मौके पर ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने ‘भुली’ कार्यक्रम का भी विधिवत शुभारंभ किया। आपको बता दें कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पहाड़ी बोली में ‘भुली’ का अर्थ ‘छोटी बहन’ होता है। सरकार ने इसी अपनेपन के साथ ‘बिजनेस हैंडहोल्डिंग यूनिट फॉर लाइवलीहुड इन्क्यूबेशन’ प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारा है, ताकि स्वयं सहायता समूहों की बहनों को नई ताकत मिल सके।

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स्वरोजगार से आगे बढ़कर ‘सफल उद्यमी’ बनेंगी महिलाएं

ग्राम्य विकास मंत्री ने लखपति दीदियों की सराहना करते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने दम पर पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। सरकार अब ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ छोटे-मोटे स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें बड़े और सफल बिजनेसमैन के रूप में स्थापित करना चाहती है।

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इसी विजन के तहत महिलाओं को वित्तीय सहयोग जिसमें ₹3.58 लाख तक का पूरी तरह से ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था, तकनीकी सपोर्ट के तहत व्यापार को आधुनिक बनाने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की व्यवस्था और विपणन सहयोग के तहत तैयार उत्पादों को बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचाना जैसे इन तीन स्तरों पर मजबूत किया जाएगा।

आईआईएम काशीपुर संभालेगा तकनीकी कमान

महिला उद्यमियों के इस पूरे प्रोजेक्ट को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम काशीपुर को जोड़ा गया है। आईआईएम काशीपुर की एक विशेष एक्सपर्ट टीम इन लखपति दीदियों को बिजनेस मैनेजमेंट, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करेगी। इस पार्टनरशिप से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

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इस गरिमामयी कार्यक्रम में ग्राम्य विकास विभाग की आयुक्त अनुराधा पाल, अपर सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी झरना कमठान और आईआईएम काशीपुर के निदेशक विशेष रूप से उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि ‘भुली’ योजना के तहत मिलने वाली मदद से उत्तराखंड के गांवों से पलायन रुकेगा और हमारी बहनें राज्य की आर्थिक तरक्की की मुख्य सारथी बनेंगी।

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