देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने देहरादून में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रगति और जारी नोटिसों पर विस्तृत चर्चा करते हुए राजनीतिक दलों से सीधे फीडबैक लिया।
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वर्तमान में जारी कुल 24 लाख नोटिसों के सापेक्ष लगभग 19 लाख (77%) नोटिस बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं।
जनता को राहत देते हुए CEO ने सभी जनपदों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सामान्य विसंगति वाले नोटिसों का निस्तारण स्थानीय स्तर पर ही किया जाए। इसके लिए BLOs स्वयं मतदाताओं से दस्तावेज लेकर मामलों को सत्यापित करेंगे, ताकि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि एक सामान्य मतदाता अधिकतम 5 मामलों में अपने दावे या आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है। इससे अधिक मामले सामने आने पर संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (EROs) स्वयं अपने स्तर पर उनकी गहन जांच और सत्यापन करेंगे।
राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के लिए भी सीमाएं तय की गई हैं। एजेंट्स एक दिन में अधिकतम 10 फार्म प्रस्तुत कर सकते हैं। संपूर्ण पुनरीक्षण अवधि के दौरान यदि किसी एजेंट द्वारा 30 से अधिक फार्म दिए जाते हैं, तो ERO द्वारा उन सभी मामलों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मतदाताओं की मैपिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है, उन पर विशेष फोकस रखा जाए। ERO और AERO स्तर पर ऐसे मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई कर जल्द से जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा से राजकुमार पुरोहित, कांग्रेस से सूर्यकांत धस्माना व अमेंद्र बिष्ट, बसपा से सतेंद्र चोपड़ा व जसपाल, और सीपीआई से अनंत आकाश उपस्थित रहे। सभी प्रतिनिधियों को SIR के नोटिस फेज की सुनवाई प्रक्रिया पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया।

