हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में बुधवार को आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की दिशा और प्राथमिकताएं पूरी तरह साफ कर दी गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उपस्थिति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की अगुवाई में वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की चुनौतियों पर मंथन किया। इस बैठक का मुख्य लक्ष्य ‘मिशन 2027’ के तहत राज्य की 60 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करना तय किया गया है।
हल्द्वानी के रणनीतिक मंथन में बीजेपी ने उन कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने पर जोर दिया, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा था। गौरतलब है कि साल 2017 के चुनाव में 57 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2022 में घटकर 47 सीटों पर आ गई थी, जबकि कांग्रेस 19 सीटों पर सिमटी थी। अब मौजूदा आंकड़ों से 13 सीटों की बढ़त बनाकर 60 का आंकड़ा छूना पार्टी के लिए एक कड़ी चुनौती माना जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क कनेक्टिविटी जैसे जमीनी मुद्दे बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होंगे। राज्य सरकार द्वारा होमस्टे, बागवानी, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किए गए कार्यों को धरातल पर चुनावी नतीजों में बदलना होगा। पहाड़ में युवाओं को रोजगार और मूलभूत सुविधाएं देना ही जनता की चुनावी धारणा तय करेगा।
चुनावी रण में 60 प्लस के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी के सामने 10 प्रमुख इम्तिहान चिन्हित किए गए हैं। इनमें 60 प्लस मिशन को पूरा करना, तराई के इलाकों में मजबूत वापसी, पहाड़ का भरोसा कायम रखना और युवाओं से सीधा जुड़ाव शामिल है।
इसके अलावा रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद उत्पन्न हुआ कथित शुद्धिकरण विवाद, बनभूलपुरा प्रकरण, सरकार के सख्त फैसलों का नरेटिव बनाना, सामाजिक समीकरणों को साधना, टिकट वितरण व भितरघात से बचना और बूथ स्तर पर जीत दर्ज करना प्रमुख चुनौतियां हैं।
स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों की बात करें तो रामलीला मैदान का कथित शुद्धिकरण विवाद अब पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कानूनी रूप ले चुका है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान का मुद्दा बना रही है, वहीं बीजेपी को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय पारदर्शी जांच पर जोर देना होगा। इसके अलावा बनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण में भी पार्टी को कानून के राज और सामाजिक सरोकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, तराई में बढ़त बनाए बिना 60 प्लस का लक्ष्य पाना नामुमकिन है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों की कुल 20 विधानसभा सीटें बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं, क्योंकि 2022 में पार्टी इनमें से केवल 7 सीटें ही जीत सकी थी। इसलिए किसान, सिख, दलित, मुस्लिम और प्रवासी मतदाताओं के बीच पैठ बढ़ाना बीजेपी के लिए अनिवार्य शर्त है।
मैदानी और तराई क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी सरकार की सख्त छवि और सुशासन के फैसलों को सामने रखेगी। इसमें सरकारी और रेलवे भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर की गई कानूनी कार्रवाई को ‘कानून का राज’ बताकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी है। हल्द्वानी की यह कार्यसमिति सत्ता के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड के चुनावी भूगोल को दोबारा साधने की एक बड़ी कवायद साबित हुई है।

