ऋषिकेश। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध निजी संस्थानों में प्रवेश नियमों और इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों को लेकर चल रहे विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विवि ने कॉलेजों की व्यवस्थाओं और आधारभूत ढांचे की धरातलीय जांच के लिए 19 अलग-अलग निरीक्षण टीमों का गठन कर औचक निरीक्षण शुरू कर दिया है।
पिछले 10 दिनों से जारी इस जांच प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग द्वारा निर्धारित मानकों, क्लिनिकल सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और पढ़ाई की जरूरी व्यवस्थाओं की गहन पड़ताल की जा रही है। इस कार्रवाई से निजी आयुर्वेद कॉलेज प्रबंधनों में हड़कंप मचा हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने निरीक्षण टीमों को सख्त निर्देश दिए हैं कि केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता या काउंसलिंग में प्रवेश की अनुमति न दी जाए। टीमों को मौके पर मौजूद वास्तविक संसाधनों की भौतिक जांच के साथ तस्वीरें और साक्ष्य जुटाकर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
विवि के कुलसचिव डॉ. एसके बर्नवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई या दबाव में बनाई गई गलत रिपोर्ट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोबारा जांच में पहली रिपोर्ट गलत पाई जाती है, तो संबंधित निरीक्षण टीम के सदस्यों के खिलाफ सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कुलसचिव ने साफ किया कि निरीक्षण में जो भी निजी संस्थान NCISM के तय मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उसे आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेने और नए प्रवेश देने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत करते हुए विवि पहले ही कई संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है, जबकि उत्तरकाशी जिले के एक निजी आयुर्वेद संस्थान की मान्यता रद्द की जा चुकी है। आने वाले दिनों में गंभीर कमियां पाए जाने पर अन्य कॉलेजों के डी-एफिलिएशन की कार्रवाई भी की जाएगी।
गौरतलब है कि निजी कॉलेजों में गैर-काउंसलिंग के जरिए वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच हुए दाखिलों को लेकर कई शैक्षणिक बैच लंबे समय से विवादों में हैं। नियमों के विपरीत दिए गए इन प्रवेशों के कारण करीब 500 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, काउंसलिंग से सीटें न भरने पर कुछ कॉलेजों ने मनमाने तरीके से सीधे दाखिले दे दिए थे, जिसके बाद नामांकन और परीक्षा का विवाद अदालतों तक पहुंचा। वर्ष 2024 में भी दो कॉलेजों में नियम विरुद्ध प्रवेश का गंभीर मामला सामने आया था, जिसकी कानूनी लड़ाई देश की शीर्ष अदालत तक पहुंची थी।

