धामी सरकार का ऐतिहासिक मास्टर स्ट्रोक, 20 हजार उपनल कर्मियों का 10 साल का इंतजार खत्म

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देहरादून। रक्षाबंधन से ठीक पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वो कर दिखाया जो पिछली सरकारें सालों से नहीं कर पाई थीं। उपनल कर्मियों के लिए समान काम का समान वेतन की राह में आ रही हर कानूनी और तकनीकी अड़चन को धामी सरकार ने एक झटके में दूर कर दिया है।सूबे के 20 हजार से ज्यादा उपनल कर्मचारियों के चेहरे पर आज असली मुस्कान है, और इसकी वजह है धामी कैबिनेट का वो बड़ा फैसला जिस पर आज मुहर लग गई।

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धामी सरकार के 3 बड़े फैसले जो बने गेम चेंजर –

1. सेवा निरंतरता की शर्त खत्म: जो कर्मचारी इस वजह से समान वेतन से वंचित रह जाते थे, मुख्यमंत्री धामी ने मानवीय फैसला लेते हुए ये शर्त ही हटा दी। ये सीधे-सीधे कर्मचारियों के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय है।

2. बिना पद स्वीकृति वालों को भी राहत: जो कर्मचारी बिना पद स्वीकृति के नियुक्त हुए थे, उनके लिए भी पद स्वीकृति पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। धामी सरकार ने साबित किया कि वो किसी भी कर्मचारी को पीछे नहीं छोड़ेगी।

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3. तीन श्रेणियों में साफ टाइम टेबल: सरकार ने गोलमोल जवाब नहीं दिया, बल्कि साफ तारीखों के साथ रोडमैप दिया है।पहली श्रेणी: 01 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मी – इन्हें समान वेतन देने की प्रक्रिय जारी है। दूसरी श्रेणी: 01 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मी – इन्हें राज्य स्थापना दिवस, 09 नवंबर 2026 से समान वेतन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

तीसरी श्रेणी: 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 तक नियुक्त कर्मी – इन्हें 01 अप्रैल 2027 से लाभ मिलेगा।इतना ही नहीं, अब इन कर्मचारियों को वेतनमान का न्यूनतम वेतन और समय-समय पर बढ़ने वाले महंगाई भत्ते का भी पूरा लाभ मिलेगा। साफ है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न सिर्फ उपनल कर्मियों की सालों पुरानी मांग को सुना, बल्कि उसे जमीन पर उतारने का पक्का फॉर्मूला भी दे दिया। कर्मचारी संगठनों ने इसे धामी सरकार का सबसे संवेदनशील और निर्णायक फैसला बताया है।

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