देश के 13 प्रमुख शहरों में हाईस्पीड कॉरिडोर पर रेंग रहे ट्रक, वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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भारत की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले हाईस्पीड कॉरिडोर वर्तमान में ट्रकों की रफ्तार के लिए बड़ी बाधा साबित हो रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश के उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाले सुपरफास्ट रास्तों पर स्थित 13 प्रमुख शहरों में पहुँचते ही ट्रकों की गति नाटकीय रूप से कम हो जाती है। रिपोर्ट बताती है कि इन शहरों की सीमाओं पर ट्रकों की औसत रफ्तार 60 किमी प्रति घंटा से घटकर महज 23 से 36 किमी प्रति घंटा रह जाती है।

झांसी, मैनपुरी, विशाखापत्तनम, हैदराबाद और दिल्ली जैसे प्रमुख केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्था के कारण न केवल माल पहुँचने में देरी हो रही है, बल्कि इससे देश के लॉजिस्टिक तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। करोड़ों के निवेश से बने ये गलियारे खराब ट्रैफिक प्रबंधन और संकरी सड़कों के कारण अपना वास्तविक उद्देश्य पूरा करने में विफल साबित हो रहे हैं।

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प्रमुख कॉरिडोर पर सुस्त रफ्तार और ईंधन की बर्बादी

रिपोर्ट में देश के पांच सबसे व्यस्त कॉरिडोर का विश्लेषण किया गया है, जिसमें बेंगलुरु-कोलकाता कॉरिडोर की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई है। यहाँ विशाखापत्तनम में ट्रकों की रफ्तार घटकर मात्र 23 किमी प्रति घंटा रह जाती है, जबकि मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर पर भी स्थिति कुछ खास बेहतर नहीं है।

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ट्रकों की इस धीमी गति का मुख्य कारण केवल ट्रैफिक नहीं, बल्कि शहरों के एंट्री पॉइंट पर सड़कों का अचानक संकरा होना और बार-बार होने वाली मैन्युअल जांच है। इस सुस्त रफ्तार के कारण न केवल कीमती समय की हानि हो रही है, बल्कि भारी मात्रा में ईंधन की बर्बादी भी हो रही है, जिससे अंततः माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है।

डिजिटल प्रणालियों की विफलता और सुधार के सुझाव

विराम और रुकावटों के कारण ट्रक ऑपरेटरों का भरोसा भी टूट रहा है, क्योंकि अधिकांश वाहन फास्टैग और अन्य डिजिटल प्रणालियों से लैस होने के बावजूद जांच के नाम पर बार-बार रोके जाते हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि इन अनावश्यक ठहरावों को कम कर दिया जाए, तो एक ट्रक प्रतिदिन 30 से 50 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर सकता है।

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स्थिति में सुधार के लिए शहरी संपर्क क्षेत्रों में बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट, बाईपास के प्रभावी उपयोग और ‘मोशन वे ब्रिज’ जैसी आधुनिक तकनीकों को लागू करने की सख्त जरूरत है। इन तकनीकों के माध्यम से चलते हुए ट्रकों का वजन जांचना और ई-चालान जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं, जिससे बिना रुके माल की सुचारू आवाजाही संभव हो सकेगी।

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